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________________ बृहत् पद्मपुराण (विपणा चातृत) प्रति नं० २. पत्र संख्या ४५४. साइन ९२०५ इञ्च । प्रति प्राचीन है। फटे हुये पत्रों की मरम्मत भी पहिले हुई थी। प्रति नं २ पत्र संख्या ४३०. साइज १२५ के महाराजा श्री पृथ्वीसिंहजी के शासन का जयपुर नहीं है । आमेर भंडर के ॐ प्रति ० ३ पत्र संख्या ६३ साउन १२४५ इञ् । प्रत अपू है । प्रारम्भ के तथा अन्त के पृष्ठ नहीं हैं । । लिपि संवत १८३४. लिपिकार पंडित रायची इल्लेख किया है। प्रति अपूर्ण है प्रारम्भ के २२७ प्रति नं० ४. पत्र संख्या ४२७ साउन १२ । ४६ इव । प्रति शुद्ध, सुन्दर और प्राचीन है । वृहद् स्वयम्भूम्तोत्र । बृहत्पुण्याहवाचना । रचयिता अज्ञात भाषा संस्कृत | पत्र संख्या ४. साइज (१९४४) । लिपिकार भट्टारक श्री सुरेन्द्रकोति । लिपि संवत १=३६. लिपि स्थान माधोपुर ( जयपुर ) | प्रति नं० पत्र संख्या ४. साइज १२||४|| इञ्न । लिपि संवत् १८६६. लिपिस्थान टोंक । लिपिकार पं विजयर म रचयिता आचार्य श्री समन्तभद्र भाषा संस्कृत | प्रति २० २. पत्र संख्या ६. साइज १०/१२ इञ्च । प्रति अपूर्ण है । अन्तिम पृष्ठ नहीं है बृहद् सिद्धचक्रपूजा | -; रचयिता श्री भट्टारक शुभचन्द्र । भाषा संस्कृत | पत्र संख्या १= साइज १०|| ४ || इ | लिपि 47: संवत् १६१८. वृहद् शान्ति पूजा | भाषा संस्कृत | पत्र संख्या ६. साइज ६x४ || इञ्च । लिपि संवत् १८८९ पंडित हरचन्द्र ने बोरी गांव में उक्त पूजा की प्रतिलिपि बनाई । Projustag एक सौ ती re शान्तिकविधान | रचयिता पं० आशावर | भाषा संस्कृत | पत्र संख्या ५ = साइज १०x४ | | ३३ । विषय-पूजा |
SR No.090392
Book TitleRajasthan ke Jain Shastra Bhandaronki Granth Soochi Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKasturchand Kasliwal
PublisherRamchandra Khinduka
Publication Year
Total Pages226
LanguageHindi
ClassificationCatalogue, Literature, Biography, & Catalogue
File Size5 MB
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