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________________ ( १८ ) १४८-१५० १४६ १५०-१५२ १५२-१५५ १५३ गास ५५ __सातादनीय कर्मबन्ध के विशेष कारण और उनकी व्याख्या गाना ५६ दर्शनमोहनीव के बन्ध के कारण गाथा ५७ चारित्रमोहनीय के बन्ध के कारण नरकायुष्प के बंध के कारण पापा ५८ तिर्यचायु व मनुष्यायु के बंध के कारण गाथा ५६ देवायु के बंध के कारण शुभ और अशुभ नामकर्म के बंध के कारण गाया ६० गोत्रकर्म के बन्ध के कारण गाया ६१ अन्तरायकर्म के बन्ध के कारण १५६-१५८ । १५६ १५७ १५-१५६ १५६-१६ परिशिष्ट १६४ • कर्म की मूल एवं उत्तर प्रकृतियों की संख्या तथा नाम ० नामकर्म की प्रकृतियों की गणना का विशेष स्पष्टीकरण ० बंध, उदय, उदीरणा एवं सत्तायोग्य प्रकृतियों की संख्या • कर्मबंध के विशेष कारण सम्बन्धी आगम पाठ ० कर्म साहित्य विषयक समान-असमान मन्तव्य • अष्टमहाप्रातिहार्य, संहनन एवं संस्थान के चित्र १७८ १८६-११
SR No.090239
Book TitleKarmagrantha Part 1
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorShreechand Surana, Devkumar Jain Shastri
PublisherMarudharkesari Sahitya Prakashan Samiti Jodhpur
Publication Year
Total Pages271
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Karma, & Religion
File Size4 MB
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