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जयधवलासहिये कसायपाहुडे
[ वेदगो ७
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$ ३९८. सव्वणिरय - सव्वपंचिदियतिरिक्ख- मणुस अपज० – देवा भवणादि जाव णवगेवजा त्ति सव्वपय० सव्वपदा० केन्तिया ? असंखेजा । मणुसेसु पंचिंदियतिरिक्खभंगो । णवरि मिच्छ० - णवं स० अवस० सम्म० - सम्मामि ० - इत्थि वेद - पुरिसवेद सव्वपदा० केत्तिया ९ संखेआ । मणुसपअ० मणुसिणी - सव्वदेवा० सव्वपय ० सव्वपदा० केत्तिया ? संखेजा । अणुद्दिसादि अवराजिदा ति सव्वपय० सव्वपदा० असंखेजा । णवरि सम्म० अवत्त ० संखेजा । एवं जाव० ।
सम्म - सम्मामि ०
९ ३९९. खेत्ताणुगमेण दुविदो णिसो- ओषेण आदेसेण य । ओषेण मिच्छ०ण स० - तिण्णिपदा० केवड खेसे सव्वलोगे । अवत्त० लोग० असंखे० भागे । सोलसक० - छण्णोक० सव्वपदा केवडि खेत्ते १ सव्यलोगे । इत्थवेद - पुरिसवेद० सव्वपदा० केबडि खेत्ते १ लोग ० असंखेभागे । सगदी सव्वपयडीणं सव्वपदा० केव० लोग० असंखे ० भागे । एवं जाव० । $४००. पोसणाणुगमेण दुविहो णिद्दसो- ओघेण आदेसेण य । ओषेण मिच्छत्त० तिणिपद० के० पोसिदं १ सव्वलोगो । अवत्त० लोग० असंखे ० भागो अट्ठ बारह
एवं तिरिक्खा० ।
$ ३९८. सब नारकी, सब पचेन्द्रिय तिर्यन, मनुष्य अपर्याप्त, सामान्य देव और भवनवासियोंसे लेकर नौ वैयक तकके देवोंमें सब प्रकृतियोंके सब पदोंके उदीरक जीव कितने हैं ? असंख्यात हैं । सामान्य मनुष्यों में पचेन्द्रिय तिर्योंके समान भंग है । इतनी विशेषता इनमें मिथ्यात्व और नपुंसकवेदके अवक्तव्य पदके उदीरक जीव तथा सम्यक्त्व, सम्यग्मिथ्यात्व, स्त्रीवेद और पुरुषवेदके सब पदोंके उदीरक जीव कितने हैं ? संख्यात हैं । मनुष्य पर्याप्त, मनुष्यनी और सर्वार्थसिद्धिके देवोंमें सब प्रकृतियोंके सब पदोंके उदीरक जीव कितने हैं ? संख्यात हैं। अनुदिशसे लेकर अपराजित विमान तकके देवोंमें सब प्रकृतियोंके सब पदोंके उदीरक जीव असंख्यात हैं । इतनी विशेषता है कि इनमें सम्यक्त्वके अवक्तव्य पदके उदीरक जीव संख्यात हैं । इसी प्रकार अनाहारक मार्गणा तक जानना चाहिए ।
$ ३९९. क्षेत्रानुगमकी अपेक्षा निर्देश दो प्रकारका है-ओघ और आदेश | ओघ मिथ्यात्व और नपु ंसकवेदके तीन पदोंके उदीरकोंका कितना क्षेत्र हैं ? सर्व लोकप्रमाण क्षेत्र है | अवक्तव्य पदके उदीरकोंका लोकके असंख्यातवें भागप्रमाण क्षेत्र है । सोलह कषाय और छह नोकषायोंके सब पदोंके उदीरकोंका कितना क्षेत्र है ? सर्वलोकप्रमाण क्षेत्र है । सम्यक्त्व, सम्यग्मिथ्यात्व, स्त्रीवेद और पुरुषवेदके सब पदोंके उदीरकोंका कितना क्षेत्र है ? लोकके असंख्यातवें भागप्रमाण क्षेत्र है । इसी प्रकार सामान्य तिर्यों में जानना चाहिए। शेष गतियोंमें सब प्रकृतियोंके सब पदोंके उदीरकोंका कितना क्षेत्र है ? लोकके असंख्यातवें भागप्रमाण क्षेत्र है। इसी प्रकार अनाहारक मार्गणा तक जानना चाहिए ।
$ ४००. स्पर्शनानुगमकी अपेक्षा निर्देश दो प्रकारका है-ओघ और आदेश । ओघसे मिथ्यात्वके तीन पदके उदीरकोंने कितने क्षेत्रका स्पर्शन किया है ? सर्व लोकप्रमाण क्षेत्रका स्पर्शन किया है । अवक्तव्य पदके उदीरकोंने लोकके असंख्यातवें भाग और त्रसनालीके चौदह भागों में से कुछ कम आठ और कुछ कम बारह भागप्रमाण क्षेत्रका स्पर्शन किया है । इसी प्रकार नपुंसकवेदके उदीरकोंकी अपेक्षा स्पर्शन जानना चाहिए। इतनी विशेषता है कि