SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 54
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ २८ ] अन्य विधि नं. घंटे के आकार के यंत्र को घंटे के ऊपर खुदवाकर घंटे की प्राण प्रतिष्ठा करें । घण्टाकरणं मूलमंत्र का १२५०० (बारह हजार पांच सौ शुद्ध वस्त्रादि पहनकर दीप धूप जलाकर चंदन की माला से जाय करें । यंत्र को पूजा घण्टाकर मंत्र कल्पः जब तक जाय पूरा न हो तब तक यंत्र का पंचामृत अभिषेक करके -अष्टद्रव्य से पूजा करें, जाप्य पूरा होने पर उत्तम उत्तम पदार्थों से दशांश होम करें अथवा गुगुल से हवन करें । फायदा है । उस घंटे को ऊंचे लटका कर घण्टा बजावे जितने प्रदेश में इस घंटे की safe जायेंगी, उतने प्रदेश का वातावरण शुद्ध हो जायगा । उतने प्रदेश में किसी प्रकार को मारि भरि आदि नाना प्रकार को व्याधि नष्ट हो जाती है । यह घण्टा कार्य पड़े तब ही बजायें नित्य नहीं । यह यंत्र सर्व व्याधि विनाशक है । मंत्र का जाप करते समय जितनी शुद्धता और स्वच्छता रखोगे उतना ही मो दय ७ Stor tummy टा ६ बार शुद्धि पूर्वक मन एकाग्र करके. [ यंत्र चित्र नं० १५ ]. ६
SR No.090176
Book TitleGhantamantrakalpa
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages88
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Worship, & Worship
File Size3 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy