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________________ सूत्र विषय पृष्ठांक विषय पृष्ठांक १०. देने की विवक्षा से पुरुषों के सुमनस्कादि त्रिविधत्व का प्ररूपण, १३०४-१३०५ ११. भोजन की विवक्षा से पुरुषों के सुमनस्कादि त्रिविधत्व का प्ररूपण, १३०५-१३०६ १२. प्राप्ति-अप्राप्ति की विवक्षा से पुरुषों के सुमनस्कादि त्रिविधत्व का प्ररूपण, १३०६ १३. पीने की विवक्षा से पुरुषों के सुमनस्कादि त्रिविधत्व का प्ररूपण, १३०६-१३०७ १४. सोने की विवक्षा से पुरुषों के सुमनस्कादि त्रिविधत्व का प्ररूपण, १३०७-१३०८ १५. युद्ध की विवक्षा से पुरुषों के सुमनस्कादि त्रिविधत्व का प्ररूपण, १३०८-१३०९ १६. जय की विवक्षा से पुरुषों के सुमनस्कादि त्रिविधत्व का प्ररूपण, १३०९ १७. पराजय की विवक्षा से पुरुषों के सुमनस्कादि त्रिविधत्व का प्ररूपण, १३०९-१३१० १८. श्रवण की विवक्षा से पुरुषों के 'सुमनस्कादि त्रिविधत्व का प्ररूपण, १३१०-१३११ १९. देखने की विवक्षा से पुरुषों के सुमनस्कादि त्रिविधत्व का प्ररूपण, १३११ २०. सूंघने की विवक्षा से पुरुषों के सुमनस्कादि त्रिविधत्व का प्ररूपण, १३१२ २१. आस्वाद की विवक्षा से पुरुषों के सुमनस्कादि त्रिविधत्व का प्ररूपण, १३१२-१३१३ २२. स्पर्श की विवक्षा से पुरुषों के सुमनस्कादि त्रिविधत्व का प्ररूपण, १३१३-१३१४ २३. शुद्ध-अशुद्ध मन संकल्पादि की विवक्षा से पुरुषों के चतुर्भंगों का प्ररूपण, १३१४-१३१५ २४. पवित्र-अपवित्र मन संकल्पादि की विवक्षा से पुरुषों के चतुर्भंगों का प्ररूपण, १३१५-१३१७ २५. उन्नत-प्रणत मन संकल्पादि की विवक्षा से पुरुषों के चतुर्भंगों का प्ररूपण, १३१७-१३१८ २६. ऋजु वक्र मन संकल्पादि की विवक्षा से पुरुषों के चतुर्भंगों का प्ररूपण, १३१८-१३१९ २७. उच्च-नीच विचारों की विवक्षा से पुरुषों के चतुर्विधत्व का प्ररूपण, १३१९ २८. सत्य-असत्य परिणतादि की विवक्षा से पुरुषों के चतुर्भंगों का प्ररूपण, १३२०-१३२१ २९. आर्य-अनार्य की विवक्षा से पुरुषों के चतुभंगों का प्ररूपण, १३२१-१३२३ ३०. प्रीति और अप्रीति की विवक्षा से पुरुषों के चतुर्विधत्व का प्ररूपण, १३२३-१३२४ ३१. मित्र-अमित्र के दृष्टांत द्वारा पुरुषों के चतुर्भंगों का प्ररूपण, १३२४ ३२. आत्मानुकंप-परानुकंप के भेद से पुरुषों ___ के चतुर्भगों का प्ररूपण, १३२४ ३३. स्व-पर का निग्रह करने की विवक्षा से पुरुषों के चतुभंगों का प्ररूपण, १३२५ ३४. आत्म-पर के अंतकरादि की विवक्षा से पुरुषों के चतुर्भंगों का प्ररूपण, १३२५ ३५. आत्मभर-परंभर की अपेक्षा से पुरुषों के चतुर्भगों का प्ररूपण, १३२५-१३२६ ३६. इहार्थ-परार्थ की अपेक्षा से पुरुषों के चतुर्भगों का प्ररूपण, १३२६ ३७. जाति-कुल-बल-रूप-श्रुत और शील की विवक्षा से पुरुषों के चतुभंगों का प्ररूपण, १३२६-१३२९ ३८. निष्कृष्ट-अनिष्कृष्ट के भेद से पुरुषों के चतुभंगों का प्ररूपण, १३२९ ३९. दीन-अदीन परिणति आदि की विवक्षा से पुरुषों के चतुभंगों का प्ररूपण, १३२९-१३३१ ४०. परिज्ञात-अपरिज्ञात की अपेक्षा पुरुषों के चतुर्भंगों का प्ररूपण, १३३१-१३३२ ४१. आपात-संवास भद्र की विवक्षा से पुरुषों के चतुर्भंगों का प्ररूपण, १३३२ ४२. सुगत-दुर्गत की अपेक्षा पुरुषों के चतुर्भंगों का प्ररूपण, १३३२-१३३३ ४३. मुक्त-अमुक्त के दृष्टांत द्वारा पुरुषों के चतुर्भगों का प्ररूपण, १३३३ ४४. कृश और दृढ़ की विवक्षा से पुरुषों के चतुर्भंगों का प्ररूपण, १३३३-१३३४ ४५. वर्ण्य के दर्शन उपशमन और उदीरण की विवक्षा से पुरुषों के चतुर्भंगों का प्ररूपण, १३३४-१३३५ ४६. उदय-अस्त की विवक्षा से पुरुषों के चतुर्विधत्व का प्ररूपण, १३३५ ४७. आख्यायक की विवक्षा से पुरुषों के चतुर्भगों का प्ररूपण, १३३५ ४८..अर्थ और मानकरण की अपेक्षा पुरुषों के चतुर्भंगों का प्ररूपण, १३३५-१३३६ ४९. वैयावृत्य करने की विवक्षा से पुरुषों के चतुर्भंगों का प्ररूपण, १३३६ ५०. पुरुषों के चार प्रकारों का प्ररूपण, १३३६ ५१. व्रण दृष्टांत के द्वारा पुरुषों के चतुर्भगों का प्ररूपण, १३३६-१३३७ ५२. वन खण्ड के दृष्टांत द्वारा पुरुषों के चतुर्भंगों का प्ररूपण, १३३७ (३१)
SR No.090159
Book TitleDravyanuyoga Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj & Others
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1995
Total Pages806
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Metaphysics, Agam, Canon, & agam_related_other_literature
File Size29 MB
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