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________________ कर्म अध्ययन ११२३ पडिवज्जमाणए पडुच्च१. मणुसो वा बंधइ, २. मणुस्सी वा बंधइ, ३. मणुस्सा वा बंधति, ४. मणुस्सीओ वा बंधति, ५. अहवा मणुस्सोय मणुस्सी य बंधइ, ६. अहवा मणुस्सो य, मणुस्सीओ य बंधंति, ७. अहवा मणुस्सा य, मणुस्सी य बंधइ, ८. अहवा मणुस्सा य, मणुस्सीओ य बंधंति। प. तं भंते ! किं इत्थी बंधइ, पुरिसो बंधइ, नपुंसगो बंधइ, इत्थीओ बंधति,पुरिसा बंधति, नपुंसगा बंधंति, नो इत्थी, नो पुरिसो, नो नपुंसगो बंधइ? उ. गोयमा ! नो इत्थी बंधइ, नो पुरिसो बंधइ, नो नपुंसगो बंधइ, नो इत्थीओ बंधति, नो पुरिसा बंधंति, नो नपुंसगा बंधति; नो इत्थी नो पुरिसो नो नपुंसगो बंधइ, पुव्वपडिवन्नए पडुच्च अवगयवेदा बंधति, पडिवज्जमाणए य पडुच्च अवगयवेदो वा बंधइ, अवगयवेदा वा बंधंति। प. जइ भंते ! अवगयवेदो वा बंधइ, अवगयवेदा वा बंधति तं भंते ! किं १. इत्थीपच्छाकडो बंधइ, प्रतिपद्यमान की अपेक्षा१. मनुष्य-पुरुष बांधता है, २. मनुष्य स्त्री बांधती है, ३. बहुत से मनुष्य पुरुष बांधते हैं, ४. बहुत-सी मनुष्य स्त्रियां बांधती हैं, ५. अथवा एक मनुष्य और एक मनुष्य-स्त्री बांधती है। ६. अथवा एक मनुष्य-पुरुष और बहुत-सी मनुष्य-स्त्रियां बांधती हैं, ७. अथवा बहुत-से मनुष्य पुरुष और एक मनुष्य-स्त्री बांधती है, ८. अथवा बहुत से मनुष्य पुरुष और बहुत-सी मनुष्य स्त्रियां बांधती हैं। प्र. भंते ! क्या (ऐर्यापथिक (कर्म) बन्ध) स्त्री बांधती है, पुरुष बांधता है या नपुंसक बांधता है, स्त्रियां बांधती हैं, पुरुष बांधते हैं या नपुंसक बांधते हैं, या नो स्त्री, नो पुरुष, नो नपुंसक बांधता है? उ. गौतम ! इसे स्त्री नहीं बांधती, पुरुष नहीं बांधता, नपुंसक नहीं बांधता, स्त्रियां नहीं बांधती, पुरुष नहीं बांधते और नपुंसक भी नहीं बांधते हैं किन्तु नो स्त्री, नो पुरुष और नो नपुंसक बांधता है। पूर्वप्रतिपन्नक की अपेक्षा वेदरहित (बहुत से) जीव बांधते हैं, प्रतिपद्यमान की अपेक्षा वेदरहित (एक) जीव बांधता है या (बहुत से) वेदरहित जीव बांधते हैं। प्र. भंते ! यदि वेदरहित एक जीव या वेदरहित बहुत से जीव (ऐर्यापथिक कर्म) बांधते हैं तो क्या१. स्त्री-पश्चात्कृत जीव (जो जीव भूतकाल में स्त्रीवेदी था, अब वर्तमान काल में अवेदी हो गया है) बांधता है? २. पुरुष-पश्चात्कृत जीव (जो जीव पहले पुरुषवेदी था, अब अवेदी हो गया है) बांधता है? ३. नपुंसक-पश्चात्कृत जीव (जो पहले नपुंसकवेदी था, - अब अवेदी हो गया है) बांधता है? ४. स्त्रीपश्चात्कृत जीव बांधते हैं ? ५. पुरुषपश्चात्कृत जीव बांधते हैं ? ६. नपुंसकपश्चात्कृत जीव बांधते हैं ? ७. अथवा एक स्त्रीपश्चात्कृत जीव और एक पुरुषपश्चात्कृत जीव बांधता है ? ८. एक स्त्री-पश्चात्कृत जीव बहुत पुरुषपश्चात्कृत जीव बांधते हैं? ९. अथवा बहुत स्त्रीपश्चात्कृत जीव और एक पुरुषपश्चात्कृत जीव बांधता है? १०. अथवा बहुत स्त्रीपश्चात्कृत जीव और बहुत पुरुषपश्चात्कृत जीव बांधते हैं? ११. अथवा एक स्त्रीपश्चात्कृत जीव और एक नपुंसकपश्चात्कृत जीव बांधता है ? २. पुरिसपच्छाकडो बंधइ, ३. नपुंसकपच्छाकडो बंधइ, ४. इत्थीपच्छाकडा बंधंति, ५. पुरिसपच्छाकडा बंधंति, ६. नपुंसकपच्छाकडा बंधति, ७. अहवा इत्थीपच्छाकडो य,पुरिसपच्छाकडो य बंधइ, ८. अहवा इत्थीपच्छाकडो य, पुरिसपच्छाकडा य बंधंति, ९. अहवा इत्थीपच्छाकडा य, पुरिसपच्छाकडो य बंधइ, १०. अहवा इत्थीपच्छाकडा य, पुरिसपच्छाकडा य बंधंति, ११. अहवा इत्थीपच्छाकडो य, नपुंसक पच्छाकडो य बंधइ,
SR No.090159
Book TitleDravyanuyoga Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj & Others
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1995
Total Pages806
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Metaphysics, Agam, Canon, & agam_related_other_literature
File Size29 MB
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