SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 811
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ७०४ ७. भोगलद्धी, ८. उवभोगलद्धी, ९.वीरियलद्धी, १०. इंदियलद्धी प. (१क). नाणलद्धी णं भंते ! कइविहा पण्णत्ता? उ. गोयमा ! पंचविहा पण्णत्ता,तं जहा१.आभिणिबोहियनाणलद्धी जाव ५. केवलनाणलद्धी XX प. (१ख). अन्नाणलद्धी णं भंते ! कइविहा पण्णत्ता? उ. गोयमा ! तिविहा पण्णत्ता,तं जहा १. मइअन्नाणलद्धी,२.सुयअन्नाणलद्धी, ३. विभंगनाणलद्धी। xx xx प. (२) दंसणलद्धी णं भंते ! कइविहा पण्णत्ता? उ. गोयमा !तिविहा पण्णत्ता,तं जहा १. सम्मदसणलद्धी,२.मिच्छादंसणलद्धी, ३. सम्मामिच्छादसणलद्धी। xxxx प. (३) चरित्तलद्धी णं भंते ! कइविहा पण्णत्ता? उ. गोयमा ! पंचविहा पण्णत्ता,तं जहा १. सामाइयचरित्तलद्धी, २. छेदोवट्ठावणियलद्धी ३. परिहारविसुद्धलद्धी, ४. सुहुमसंपरायलद्धी, ५. अहक्खायचरित्तलद्धी। xx प. (४)चरित्ताचरित्तलद्धी णं भंते ! कइविहा पण्णत्ता? । द्रव्यानुयोग-(१)] ७. भोगलब्धि, ८. उपभोगलब्धि, ९. वीर्यलब्धि, १०. इन्द्रियलब्धि। प्र. (१क). भन्ते ! ज्ञानलब्धि कितने प्रकार की कही गई हैं ? उ. गौतम ! वह पाँच प्रकार की कही गई हैं, यथा १. आभिनिबोधिकज्ञानलब्धि यावत् ५. केवलज्ञानलब्धि। xx प्र. (१ ख). भन्ते ! अज्ञानलब्धि कितने प्रकार की कही गई हैं ? उ. गौतम ! अज्ञानलब्धि तीन प्रकार की कही गई हैं, यथा १. मति-अज्ञानलब्धि, २. श्रुत-अज्ञानलब्धि, ३. विभंगज्ञानलब्धि। xx xx xx प्र. (२) भन्ते ! दर्शनलब्धि कितने प्रकार की कही गई हैं ? उ. गौतम ! वह तीन प्रकार की कही गई हैं, यथा १. सम्यग्दर्शनलब्धि, २. मिथ्यादर्शनलब्धि, ३. सम्यग्मिथ्यादर्शनलब्धि। xx प्र. (३) भन्ते ! चारित्रलब्धि कितने प्रकार की कही गई हैं ? उ. गौतम ! चारित्रलब्धि पाँच प्रकार की कही गई हैं, यथा १. सामायिकचारित्रलब्धि, २. छेदोपस्थापनिकलब्धि, ३. परिहारविशुद्धलब्धि, ४. सूक्ष्मसम्परायलब्धि, ५. यथाख्यातचारित्रलब्धि। xx xx प्र. (४) भन्ते ! चारित्राचारित्रलब्धि कितने प्रकारकी कही उ. गोयमा ! एगागारा पण्णत्ता। (५-८) एवं दाणलद्धी, लाभलद्धी, भोगलद्धी, उवभोगलद्धी एगागारा पग्णत्ता। प. (९)वीरियलद्धी णं भंते ! कइविहा पण्णत्ता? उ. गोयमा ! तिविहा पण्णत्ता,तं जहा १. बालवीरियलद्धी,२.पंडियवीरियलद्धी, ३. बालपंडियवीरियलद्धी। प. (१०) इंदियलद्धीणं भंते ! कइविहा पण्णत्ता? उ. गोयमा ! पंचविहा पण्णत्ता,तं जहा १.सोइंदियलद्धी जाव ५.फासिंदियलद्धी। प. १.नाणलद्धिया णं भंते !जीवा किं नाणी, अन्नाणी? उ. गोयमा ! नाणी, नो अन्नाणी पंच नाणाई भयणाए। उ. गौतम ! वह एक ही प्रकार की कही गई है। (५-८) इसी प्रकार दानलब्धि, लाभलब्धि, भोगलब्धि, उपभोगलब्धि ये सब एक-एक प्रकार की कही गई हैं। प्र. (९) भन्ते ! वीर्यलब्धि कितने प्रकार की कही गई हैं? उ. गौतम ! वीर्यलब्धि तीन प्रकार की कही गई है, यथा १. बालवीर्यलब्धि, २. पण्डितवीर्यलब्धि, ३. बाल-पण्डितवीर्यलब्धि। प्र. १०. भन्ते ! इन्द्रियलब्धि कितने प्रकार की कही गई है? उ. गौतम ! वह पाँच प्रकार की कही गई है, यथा १. श्रोत्रेन्द्रियलब्धि, यावत् ५. स्पर्शेन्द्रियलब्धि। प्र. १.भन्ते ! ज्ञानलब्धि वाले जीव ज्ञानी हैं या अज्ञानी हैं ? उ. गौतम ! वे ज्ञानी हैं, अज्ञानी नहीं हैं। उनमें पाँच ज्ञान भजना (विकल्प) से पाए जाते हैं। प्र. भन्ते ! ज्ञानलब्धिरहित जीव ज्ञानी हैं या अज्ञानी हैं ? उ. गौतम ! वे ज्ञानी नहीं हैं, अज्ञानी हैं, उनमें तीन अज्ञान भजना (विकल्प) से पाए जाते हैं। प्र. भन्ते ! आभिनिबोधिकज्ञानलब्धि वाले जीव ज्ञानी हैं या अज्ञानी हैं? उ. गौतम ! वे ज्ञानी हैं, अज्ञानी नहीं है, चार ज्ञान भजना (विकल्प) से पाए जाते हैं। प. तस्स अलद्धीया णं भंते !जीवा किं नाणी, अन्नाणी? उ. गोयमा ! नो नाणी, अन्नाणी, तिण्णि अण्णाणाई भयणाए। प. आभिणिबोहियनाणलद्धिया णं भंते ! जीवा किं नाणी, अन्नाणी? उ. गोयमा ! नाणी, नो अन्नाणी, चत्तारि नाणाई भयणाए।
SR No.090158
Book TitleDravyanuyoga Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj & Others
PublisherAgam Anuyog Prakashan
Publication Year1994
Total Pages910
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Metaphysics, Agam, Canon, & agam_related_other_literature
File Size32 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy