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________________ ॐ ह्रीं मनसा कृतकुप्यबाह्यपरिग्रहविरतिमहा अपोषधोद्योतनाय नमः।। ५।। . ॐ हीं मनसा कारितकुप्यबाह्यपरिग्रहविरतिमहा व्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः।। २।। ॐ हीं मनसानुमोदितकुप्यबाह्यपरिग्रहविरतिमहा व्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः।। ३।। ॐ ह्रीं वचसा कृतकुप्यबाह्यपरिग्रहविरतिमहा व्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ४।।। ॐ हीं वचसा कारितकुप्यबाह्यपरिग्रहविरतिमहा व्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः।। ५।। ॐ हीं वचसानुमोदितकुप्यबाह्यपरिग्रहविरतिमहा व्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः।। ६।। ॐ हीं वपुषा कृतकुप्यबाह्यपरिग्रहविरतिमहा व्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः।।७।। ॐ ह्रीं वपुषा कारितकुप्यबाह्यपरिग्रहविरतिमहा व्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ८।। ॐ हीं वपुषानुमोदितकुप्यबाह्यपरिग्रहविरतिमहा व्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः।। ६।। इति परिग्रहविरतिमहाव्रतस्यैकोनविंशः प्रभेदः ६६ 92
SR No.090118
Book TitleCharitra Shuddhi Vrat
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDharmchand Shastri
PublisherJain Mahila Samaj Delhi
Publication Year
Total Pages161
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Principle, & Ethics
File Size2 MB
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