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________________ ॐ हीं मनसा कृतचतुष्पदबाह्यपरिग्रहविरतिमहा व्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः ।। १।। ॐ हीं मनसा कारितचतुष्पदबाह्यपरिग्रहविरतिमहा व्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः ।। २।। ॐ ह्रीं मनसानुमोदितचतुष्पदबाह्यपारग्रहावरतिमाह व्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ३।। ॐ ह्रीं वचसा कृतचतुष्पदबाह्यपरिग्रहविरतिमहा व्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ४।। ॐ हीं वचसा कारितचतुष्पदबाह्यपरिग्रहविरतिमहा व्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः।। ५।। ॐ हीं वचसानुमोदितचतुष्पदबाह्यपरिग्रहविरतिमहा व्रतोषधोद्योतनाय नमः।। ६।। ॐ हीं वपुषा कृतचतुष्पदबाह्यपरिग्रहविरतिमहा व्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ७।। ॐ ह्रीं वपुषा कारितचतुष्पदबाह्यपरिग्रहविरतिमहा व्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ८ ।। ॐ हीं वपुषानुमोदितचतुष्पदबाह्यपरिग्रहविरतिमहा व्रतप्रोषधोद्योतनाय नमः।। ६।। इतिपरिग्रहविरतिमहाव्रतस्य षोडषः प्रकार: ६६ ४५
SR No.090118
Book TitleCharitra Shuddhi Vrat
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDharmchand Shastri
PublisherJain Mahila Samaj Delhi
Publication Year
Total Pages161
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Principle, & Ethics
File Size2 MB
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