SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 75
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ अथ परिग्रहविरतिमहाव्रतस्य जाप्य मंत्र ॐ ह्रीं मनसा कृतक्रोधाभ्यंतरपरिग्रहविरांतमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः ।। १।। ॐ ह्रीं मनसा कारितक्रोधाभ्यंतरपरिग्रहविरतिमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः ।। २।। ॐ ह्रीं मनसानुमोदितक्रोधाभ्यंतरपरिग्रहविरतिमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ३।। ॐ ह्रीं वचसा कृतक्रोधाभ्यंतरपरिग्रहविरतिमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ४।। ॐ ह्रीं वचसा कारितक्रोधाभ्यंतरपरिग्रहविरतिमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ५।। ॐ ह्रीं वचसानुमोदितक्रोधाभ्यंतरपरिग्रहविरतिमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ६ ।। ॐ ह्रीं वपुषा कृतक्रोधाभ्यंतरपरिग्रहविरतिमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ७।। ॐ ह्रीं वपुषा कारितक्रोधाभ्यंतरपरिग्रहविरतिमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ८ ।। ॐ ह्रीं वपुषानुमोदितक्रोधाभ्यंतरपरिग्रहविरतिमहात्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ६ ।। इति परिग्रहव्रतस्य प्रथमः प्रकारः ५१ 74
SR No.090118
Book TitleCharitra Shuddhi Vrat
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDharmchand Shastri
PublisherJain Mahila Samaj Delhi
Publication Year
Total Pages161
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Principle, & Ethics
File Size2 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy