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________________ ॐ ह्रीं मनसा कृतैकांतादत्तग्रहणविरतिमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः || १|| ॐ ह्रीं मनसा कारितैकांतादत्तग्रहणविरतिमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः ।। २।। ॐ ह्रीं मनसानुमोदितैकांतादत्तग्रहणविरतिमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ३।। ॐ ह्रीं वचसा कृत्तै कांतादत्तग्रहणविरतिमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः । । ४ । । ॐ ह्रीं वचसा कारितैकांतादत्तग्रहणविरतिमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ५ ।। ॐ ह्रीं वचसानुमोदितैकांतात हरितमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः । । ६ । । ॐ ह्रीं वपुषा कृतै कांतादत्तग्रहणविरतिमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ७।। ॐ ह्रीं वपुषा कारितैकांतादत्तग्रहणविरतिमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ८ ।। ॐ ह्रीं वपुषानुमोदितैकांतादत्तग्रहणविरतिमहाव्रत प्रोषधोद्योतनाय नमः ।। ६ ।। इति अचौर्यव्रतस्य चतुर्थः प्रकारः २६ 4y
SR No.090118
Book TitleCharitra Shuddhi Vrat
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDharmchand Shastri
PublisherJain Mahila Samaj Delhi
Publication Year
Total Pages161
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Principle, & Ethics
File Size2 MB
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