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________________ - भावार्थ-वळी ते राजाए पोताना राज्यमा निंदा, परद्रोह, चाडी, कजीओ, इा विगेरेनुं निर्मूल निवा- | | रण कर्यु, तथा सात व्यसनोनो तो विशेष प्रकारे निषेध कर्यों // 285 // मिथ्यात्वं पापमन्याय, विधत्ते मनसाऽपि यः __ तस्य देवः स्वयं शिक्षा, दत्ते तत्क्षणमेव सः // 286 // भावार्थ-तेना राज्यमां कोई पण माणसे मिथ्यात्व पाप अने अनीति मनथी पण करतो तो तेने चन्द्रादित्य देव तेज क्षणे शिक्षा करतो // 286 // ... तद्देशवास्तव्यजना-स्ततः पुण्यैकबुद्धयः। .. ... राजवाऽनुवर्तन्ते, यथा राजा तथा प्रजाः // 287 // भावार्थ-पुण्यमा लीन करेली बुद्धिवाळा ते देशना लोको राजाने मार्गे धर्म अने नीतिने अनुसरवा लाग्या, || कारण के जेवो राजा होय नेत्री तेनी प्रजा होय छे / / 287 // .. .. एवं यथा यथा पृथ्व्यां, पुण्यवृद्धिस्तथा तथा। ...काले सृष्टिान्यपुष्टि बहुपुष्पफला गुमाः // 288 // .. ....... .. P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036457
Book TitleNabhak Raj Charitram Bhashantar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMerutungasuri
PublisherDosabhai Lalchand Shah
Publication Year
Total Pages108
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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