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________________ धाग्म- प्रबलदंतकं // 5 // नत्तालं व्यालमालोक्य / जीते एते नन्ने अपि // स स्माह साहसी क्रीडा रसो मम निरीक्ष्यतां // 53 // सांगोऽय समुत्तीर्य / स्थतः स महानटः // मलोमलमिवाबास्त / कुंजरं नरकुंजरः // 55 // क्रुधानिधावतस्तस्य / पुरतः स निचिदिपे // संव्यानं मस्तकारोहा५३० | त्सापराधमिव स्वकं // 55 // सिंधुरे शत्रुवत्तत्र / शुंमां कुंमलयत्यसौ // दतोर्दत्तपदः स्कंधं / त. स्यारोहन्नृकेसरी // 56 // योगिनीव स्थिरीय / तस्मिन् पृष्टमषिष्टिते // जल्ललनास्टन धाव-श्चिरं यो. // 5 // एवा जंचा हाथीने जोश्ने ते बन्ने स्त्रीने डरी गश्, त्यारे ते हिमती धम्मिले ते. जने कह्यु के तमो मारी रमतनो रस तो जुन. // 13 // परी ते पुरुषोमां हाथीसरखो सुजट सऊथ रथथी नीचे उतरीने एक मल्ल जेम बीजा मन्वने तेम ते हाथीने पडकावा लाग्यो.॥ // 55 // पनी ज्यारे क्रोधथी ते हाथी तेनी सामे दोड्यो त्यारे धम्मिले मस्तकपरथी जाणे अ. पराधी होय नहि तेम पोतानो फेंटो ते हाथीनी सामे फेंक्यो. // 15 // त्यारे हाथी शत्रनीपेठे ज्यारे पोतानी सुंढ ते फेंटापर वींटाळवा लाग्यो त्यारे माणसोमां केसरीसिंहसमान धम्मिल तेना | बन्ने दांतोपर पग मुकीने तेना मस्तकपर चमी गयो. // 56 / / पजी योगीनीपेठे स्थिर थश्ने ज्या P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036432
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages205
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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