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________________ आगम संबंधी साहित्य [भाग-2] प्रत्येकबुद्धभाषितानि ऋषिभाषितसूत्राणि ..... अध्ययन-[१३], .........मूलं [१] / गाथा [१-६] ......... पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण पुन: संकलित: (पूर्वकाले आगमरूपेण दर्शित:) "ऋषिभाषित-सूत्राणि-मूलं | [१३] 'भयालि' अध्ययनं प्रत सूत्रांक [१] गाथा सिद्धि । किमह(राव) परिध लामा, नार मेते जेण ताग मैतेज्जेण भयालिणा अरहता इसिणा बुइत-णो र खलु हो अपणो विमोयणहुना पाअभिभविमा नि. माना जाने पर अभिभूयमाणे सम मोब अहिताए भविस्सति । आताणाए उ सम्बेसि, गिहिबूरण तारए । वर्गपसारवालसंता करने संतुमिच्छसि ॥१॥ संतम्स करणं णन्थि, णासतो करणं भवे। बहुभा दि इस सुद्द , णासतो भवर मागे॥२॥ मनोज कान, हारपोरेणुगड़ियं। णिमित्तमेत्तं परो एथ.म मे तु पुरेकर्ड ॥३॥ मूलम्सेके फलुप्पत्ती, मूल ॥२१॥ बाते इनं कले। कलत्यो सिंचती नलं, फलधातो ग सिंचती ॥ ४ ॥ लुप्पती जस्स में अस्थि, प्णासंतं किंचि लुप्पती। संतातो । पता सताता २४बाहुकलग्यतो किंचि, गासन किंनि लप्पतो ॥५॥ अस्थि ने तेण देति , नस्थि मे तेण देह मे । जइ से होज में देज्जा, णत्थि से तेण देति जमायण पिभाषि मे ॥ यं से सिद्ध ।। १३ ।। भयालिनामायण ॥ १३ ॥ ||१६|| Istory दीप अनुक्रम [१३७१४३] ~28~
SR No.035072
Book TitleAagam Sambandhi Saahitya 02 Pratyek Buddhbhashitani Rushibhashitsutrani Moolam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages78
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_anykaalin
File Size12 MB
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