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________________ आगम (४०) [भाग-6] "आवश्यक"- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+वृत्ति:)४ अध्ययनं [१], नियुक्ति: [१०२५], विभा गाथा H], भाष्यं [१५१...], मूलं - /गाथा-], पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्ति एवं मलयगिरिसूरिरचिता वृत्ति: प्रत सत्राक दीप अनुक्रम श्रीआव-IC अंगोवगाणि य से जुयजुयाई कार्ड सबरत्तिं बूढो, ईसरो नमोकारपभावेण जातो, जइन होतो नमोकारो तो वेयालेणी फळे त्रिदश्यकमल- मारिजंतो, सो सुवणं होतो १॥ ज्याद्या यगिरीय- कामनिष्फत्ती नमोकारातो, कह , एगा साविगा, तीसे भत्ता मिच्छादिट्ठी, अण्णं मज आणे मग्गेइ तीसे वणएण। वृत्तौ नम- न लहाइ, ससवत्तगति, चिंतेइ-किह मारेमि!, अण्णया कण्हसप्पो घडए छभित्ता आणितो, संगोवितो, जिमितो, स्कारे भणइ-आणेह पुष्पाणि अमुगे घडए ठवियाणि, सा पविट्ठा, अंधकारंति नमोकारं चिंतेइ, जइवि मे कोइ खाएजा तोधि | मे मरंतीए नमोकारो न नस्सिहितीति, छूढो हत्थो, सप्पो देवयाए अवहितो, पुष्फमाला कया, सा गहिया दिना य से,8 ॥५५४॥ सो संभंतो चिंतेइ-अण्णाणि एयाणि पुष्फाणि, पुच्छइ य, तीए कहियं-ततो चेव घडातो आणीयाणि, गतो तत्थ, पेच्छइ घडगं पुष्पगंधं च, नवि तत्थ कोइ सप्पो, ततो आउद्दो पायवडितो सई कहेइ, खामेइ य, पच्छा सा चेव घरसामिणी जाया, एवं कामावहो नमोकारो २॥ | आरोग्गाभिरईए उदाहरण-एग नगरं नदीए तीरे, खरकम्मिएण सरीरचिंतानिग्गतेणं नदीए वुझंतं माउलिंग दिहूँ, करायाए उवणीयं, सूयस्स हत्थे दिन्नं, तेण जिमियस्स उवणीयं, पमाणेण अइरितं, गंघेण वण्णेण य, तस्स मणूसस्स राया तुट्ठो, दिण्णा भोगा, राया भणइ-अणुनदीए मग्गह, पत्थयणं गहाय पुरिसा गया, दिडो वणसंडो, जो फलाणि गेण्हइ ॥५५४॥ सो मरइ, रण्णो कहियं, भणइ-अवस्सं आणेयवाणि, गोलगपडिया वच्चंतु, एवं गया आणेति, तत्थ जस्स सो गोलगो* आगतो सो एगो वणे पविसइ, पविसित्ता फलाणि बाहिं छुभइ, ततो आणेति, जो छहइ सो मरइ, एवं वच्चंते काले साब ALSSUSARACK [१] AACK Fur & Fonte ~236~
SR No.035066
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 2 06 Aavashyak Niryukti evam Vrutti Aagam 40 Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages336
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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