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________________ आगम (४०) [भाग-6] "आवश्यक'- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+वृत्ति:) ४ अध्ययनं [१], नियुक्ति: [९४९-९५१], विभा गाथा E], भाष्यं [१५१...], मूलं [- /गाथा-], पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्ति एवं मलयगिरिसूरिरचिता वृत्ति: प्रत सुत्राक दीप अनुक्रम [१] श्रीआव- द दिई मक्कोडाण ठामं, अग्गि छुहित्ता समूलं उच्छेदियं, चाणकण दिट्ठो, रण्यो निवेदितो, रण्या सहाविसा आरक्खत्तं दिन्नं, पारिणामिश्यकमल- वीसत्था कया तेण सबै चोरा, अन्नया भत्तदाणेण वीसासेऊण सकुडुंबा मारिया ॥ एगस्थ गामे किल तिदंडिणा भिक्खा न क्या उदार यगिरीय- लद्धा, तत्थ आणा दिन्ना, अंबगेहिं बंसी परिखेत्तवा, तेहिं विवरीयंकयं, सीहिं अंबमा परिक्खित्ता, ततो रुट्ठो पलीवितो सबोकाहरणानि धृत्तौ नम- द गामो ॥ ततो कोसनिमित्त परिणामिया बुद्धी पयहिया, सोवणं थालं दीणाराण भरियं, कूउपासेहिं जूयं रमइ, जो जिण तस्स एवं, अह अहं जिणामि एक्को दीणारो दायबो, अइचिरंति अचं उवायं चिंतेइ, नगरप्पहाणाण भत्तं देइ, मजपाणं च, मत्तेसु पणचितो भणइ-दो मज्झ धाउरत्ताउ कंचणकुंडिया तिदंडं च, राया मे बसवत्ती एत्थवि ता मे होलं वापहि | ॥५३२॥ है॥१॥ एवं भणिए अन्नो असहमाणो भणइ-गयपोयगस्स मत्तस्स उप्पइयस्स जोयणसहस्सं । पए पए सवसहस्सं एत्थविता मे होलं वाएहि ।।२॥ अण्णो भणति-तिलआढगस्स उत्तस्स निप्फनस्स बहुसइबस्स ।तिले तिले सयसहस्सं एस्थवि* ता मे होलं वाएहि ॥ ३॥ अन्नो भणइ-नवपाउसंमि पुष्णाए गिरिनदीए सिग्यवेगाए । एमाहियमेसेणं नवणीएण पालि धामि, एत्थवि ता मे होलं वाएहि ॥ ४॥ अन्नो भगइ-जच्चाण नवकिसोराण तद्दिवसे जायमेत्ताण । केसेहिं नहं छाएमिर एत्थवि ता मे होलं वाएहि ॥ ५ ॥ अन्नो भणइ, दो मज्झ अस्थि रयणाणि सालिपसूई अ गद्दभिआ याछिया छिण्णा रुहइ पत्थवि ता मे होलं वाएहि ॥६॥ अन्नो भणइ-सइ सुकिलनिश्चसुगंधो भज्ज अणुवय नस्थि पचासो। निरिणो दुपंचस-18|| इतो, एत्थवि ता मे होलं वाएहि ॥७॥ एवं नाऊण रयणाणि मग्गियाणि, सालीण कोट्ठागाराणि भरियाणि, आसा एग-16 दिवसजाया मग्गिया, एगदिवसियं नवणीयं मग्गियं, एसा पारिणामिया चापकस्स बुद्धी । थूलभद्दसामिस्स पारिणा hinetbraryana IA ~192
SR No.035066
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 2 06 Aavashyak Niryukti evam Vrutti Aagam 40 Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages336
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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