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________________ आगम (४०) [भाग-6] "आवश्यक"- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+वृत्ति:) ४ अध्ययनं [१], नियुक्ति: [९४९-९५१], विभा गाथा E], भाष्यं [१५१...], मूलं [- /गाथा-], पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्ति एवं मलयगिरिसूरिरचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक 18 कुलपुत्तघरं नीतो समपितो, तं च पायकसयं सर्व पेजामोलं, मंतिपुत्तरस उक्मयं जहा सोंडीरयाए गहियंति, ततो भणियमणेण-अस्थि मे विसेसो तम्हा गच्छामो, गतो, कुमारेण रजं पत्तं, मंतिपुत्तस्स भोगा दिशा, एयस्स पारिणामिगाट बुद्धी। चाणक्षेत्ति, गोल्लविसए चणयग्गामो, तत्थ चणितो माहणो, सो अवगय० सावगो, तस्स घरे साहू ठिया, पुत्तो से जातो सह दाढाहिं, साहूण पाएसु पाडितो, कहियं च, साहहिं भणियं-राया भविस्सइ, ततो मा दुग्गति जाहितीति दंता घंसिया, पुणोषि आयरियाण कहिय, भणंति-कजउ, एत्ताहे बिंबंतरियो राया भविस्सइ, उम्मुकबालभावेण चोद्दसवि विजाठाणाणि आगमियाणि, सोऽथ सावगो संतुट्ठो, एगतो भद्दमाहणकुलातो भजा से आणीया, कालेण मायापियरो| विपण्णा, अण्णया कंमि कोउए से भज्जा मायपरं गया. केई भणंति-भाइविवाहे गया, तीसे य भगिणीतो अनेसिं खद्धादाणियाण दिपणेलियातो, तातो अलंकियविभूसियातो आगयातो, सबो परियणो तासिं समं संबट्टा, सा एगते अच्छा है अद्धिती जाया, घरं ससोगा आगया, चाणिोण पुच्छियं, न साहइ, निम्बंधे सिद्ध, तेण चिंतियं-नंदो पाइलिपुले देइ, तत्थ | Iवधामी, ततो कत्तियपुण्णिमाए पुषण्णरथे आसणे पढमं निसन्नो, तं च नंदस्स सल्लीबइयस्स राउलस्स सया उविजन सिद्धपुत्तो य नंदेण समं तत्थागतो, भणइ-एस बंभणो नंदवंसस्स छायं अकमिऊण ठितो, भणितो य दासीए-भयवं बितिए आसणे निवेसाहि, विइए आसणे कुंडियं ठवेइ, एवं तइए दंडग, चउत्थे गणेत्तियं, पंचमे जन्नोवइयं, ततो धट्ठोत्ति निच्छूढो, ततो कुवितो, पइन्नापुरस्सरं पढति-कोशेन भृत्यैश्च निबद्धमूलं, पुत्रैश्च मित्रैश्च विवृद्धशाखम् । उत्पाख्य नन्दं परिवत्र्तयिष्ये, महादुर्म वायुरियोग्रवेगः ॥१॥ ततो निग्गतो, मग्गइ पुरिसं, सुयं चणेण-विबंतरितो राया होहामित्ति, नंदस्स। CCCCC BCCCCCIENCE दीप अनुक्रम [१] ७-१-0-१00 य For FE FUC janeibraryurg ~189~
SR No.035066
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 2 06 Aavashyak Niryukti evam Vrutti Aagam 40 Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages336
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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