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________________ आगम (४०) प्रत सूत्रांक [-] दीप अनुक्रम [3] [भाग-6] “आवश्यक”- मूलसूत्र - १ (निर्युक्तिः + वृत्तिः) ४ अध्ययनं [१], निर्युक्तिः [ ९४१-९४२ ], वि० भा० गाथा [-], भाष्यं [ १५१...], मूलं [- / गाथा-], पूज्य आगमोद्धारकश्री संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनिर्युक्ति एवं मलयगिरिसूरिरचिता वृत्तिः १२ | 'खुडगे त्ति एगा परिवाइया पइण्णापुवगं भणइ जो जं करेह तं मए कायचं, रण्णा पडहगो दवावितो, खुड्डगो भिक्खापविडो सुणेइ, वारितो पडतो, गओ राउलं, दिट्ठो तीए, भणइ-कतो गिलामि ?, तेण सागारियं दाइऊण काइयाए परमं लिहियं सा न तरइ, जिया, खुड्डगस्स उप्पत्तिया बुद्धी १३ | 'मग्गिस्थि त्ति, एगो भज्जं गहाय गामंतरं वच्चइ, सा सरीरचिताए उत्तिशा, से रूवेण वाणमंतरी विलग्गा, इयरी पच्छा आगया, रडइ, ततो गाने वबहारो जातो, एगा भणइमम भत्ता, एसा कावि वाणमंतरी, इयरीवि एवं भणड, ततो कारणिगेहिं चिंतिऊण पुरिसो दूरे ठवितो, जो पढमं हत्थेण गिण्हइ तीसे भत्ता, वाणमंतरीए हत्थो दूरेण पसारिओ, नायं वाणमंतरी एसा, निद्धाडिया, कारणिगाण उत्पत्तिया बुद्धी १४ । बिइयं उदाहरणं - मग्गे मूलदेवो कंडरीतो य वचंति, इतो य- एगो पुरिसो समहिलो दिट्ठो, कंडरीतो तीसे रुवेण मुच्छितो, मूलदेवेण भणियं अहं ते घडेमि, ततो मूलदेवो तं एगंमि वणनिगुंजे ठविऊण पंथे आगतो अच्छइ, जाव सो पुरिसो समहिलो आगतो, मूलदेवेण भणियं एत्थ मम महिला पसवइ, एयं महिलं विसोह, विसज्जिया, गया, सा तेण समं अच्छिऊण आगया, आगंतूण य तत्तो पडयं घेतूण मूलदेवस्स धुत्ती भणइ हसंती-पियं खु णे दारओ जातो, दोण्हवि उप्पत्तिया बुद्धी १४ । 'प'त्ति, दोन्हं भाउगाणं एगा भजा, लोगस्स महलं कोई दोन्हवि समा, परंपरएण रण्णा सुर्य, परं विम्हयं गतो, अमच्चो भणइ-कतो एवं होहित्ति ?, अवस्सं विसेसो अस्थि, एतेण तीसे महिलाए लेहो दिनो, जहाएएहिं दोहिवि गामं गंतवं एगो पुखेण एगो अवरेणं, तद्दिवसं चैव आगंतवं, ताए महिलाए एगो पुब्वेणं पेसितो, एगो अवरेण, जो वेसो तस्स पुत्रेण, एन्तस्सवि जंतस्सवि निडाले सूरो, एवं नायं, असदहंतेसु पुणोऽवि पट्ठविऊण समगं For Private & Personal Use Only 169~
SR No.035066
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 2 06 Aavashyak Niryukti evam Vrutti Aagam 40 Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages336
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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