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________________ आगम (४०) [भाग-6] "आवश्यक"- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+वृत्ति:) ४ अध्ययनं [१], नियुक्ति: [९४१-९४२], विभा गाथा E], भाष्यं [१५१...], मूलं [- /गाथा-], पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्ति एवं मलयगिरिसूरिरचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक दीप अनुक्रम हिजो जस्स पडो सो तस्स दिनो, अन्ने भणति-दोहंपि सीसाणि ओलिहावियाणि, जस्स उण्णामओ पडो तस्स उण्णापातंतू विणिग्गया, जस्स सोसिओ तस्स सुत्ततंतू, ततो जो जस्स सो तस्स समप्पितो, कारणियाणमुप्पत्तिया बुद्धी ५। 'सरड'त्ति एगो पुरिसो सन्नं वोसिरइ, तस्स सणं वोसिरंतस्स सरडाणं परोप्परं भंडताण एगो सरडो अहिट्ठाणस्स हिट्ठा बिलं पविट्ठो, पुच्छेण य छिको, घरं गतो, अद्धितीए दुबलो जातो, मम उदरे सरडो पविट्ठोत्ति, वेजो पुच्छितो, जह सय रूवगाणं देह तो पगुणीकरोमि, मनिय, विजेण घडए सरडो छूढो लक्खाए विलिंपितो, विरेयणं दिन्नं, घडगो ठाविओ, सन्ना बोसिरिया, दिवो तडफडतो, सो जातो लट्ठीभूतो, विजस्स उप्पत्तिया बुद्धी ॥ विइयं सरडोदाहरणं-भिक्खुणा खुडगो पुच्छिओ-एस किं सीसं चालेइ ?, सो भणइ-किं भिक्खू भिक्खुणी वा, खुड्डगस्स उप्पत्तिया बुद्धी ६ । कागति, तच्चणिएण चेल्लतो पुच्छितो-अरिहंता सधण्ण् ?, चोलतो भणइ-बाद, कित्तिया इह कागा', सदि कागसहस्सा जाई वेण्णातडे परिवसंति । जइ ऊणगा पवसिया अम्भहिया पाहुणा आया ॥१॥ खुड्डगस्स उप्पत्तिया बुद्धी ॥ विइयं कागोदाहरण-एगो वाणियओ, तेण बाहिं गएण निही दिहो, तेण चिंतियं-मम घरे महिला पहाणा, सा रहस्सं धरेइ नवेति परिक्खेमि, ततो घरमागतो भणइ-पंडरगो मे कागो अहिट्ठाणं पविट्ठो, तीए सयज्झियाण कहियं, ताहि नियभत्ताराण जाव रायाए सुअं, ततो राइणा सिट्ठी हक्कारावितो, पुच्छियं, कहियं जहावट्ठियं, तुद्वो राया, दिण्णं निहाणं, मंती कतो, एयस्स उप्पत्तिया बुद्धी ७ 'उच्चारे'त्ति एगस्स धिज्जाइयस्स तरुणी भन्जा, गार्मतरं निजमाणा अंतरा धुत्तेण समं| संपलग्गा, ततो तेर्सि दोण्हपि कलहो जातो, धिज्जाइओ भणइ-मे भज्जा, इयरो भणइ-ममं, सा पुच्छिया, धुत्तं भत्तारं [१] AR JaMEducutam For F lutelu ~167
SR No.035066
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 2 06 Aavashyak Niryukti evam Vrutti Aagam 40 Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages336
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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