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________________ आगम (४०) [भाग-6] "आवश्यक"- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+वृत्ति:) ४ अध्ययनं [१], नियुक्ति: [९१८], विभा गाथा H, भाष्यं [१५१...], मूलं [- /गाथा-], पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्ति एवं मलयगिरिसूरिरचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक दीप अनुक्रम ताजे सूरा ते आणेमि, कतिहिं कजं ?, चउहिं, आणीया, सद्दवेहिणो दिसावाला कया, मंडलं कयं, दिसावाला भणिया जत्तो सिवासई सुह तं मणागं विंधह, ससरक्खा य भणिया-हुंफडिनिकए सिवारुयं करेजह, दिकरिया भणिया-तुमं तह बेव अच्छेजह, तहा कयं, विद्धा ससरक्खा,न पउणा चेडी, विपरिणतो धणो, चहेण वुर्त-मए भणियं 'जइ कहवि अवंभचारिणो होति न कज सिज्झिहिई' इत्यादि, धणेण भणियं-को उवातो?, चट्टेण भणियं-परिसा बंभचारिणो भवंति, गुत्तीतो कहेइ, दगसूयरादिसु गवेसियातो, नस्थि, साहूण दुको, तेहिं सिट्ठातो-बसहि १ कह २ सेजें ३ दिय ४ कुटुंतर ५ पुबकीलिय ६ पणीए ७ । अइमायाहार ८ विभूसणा ९य नव वंभगुत्तीतो॥शाएयासु वट्टमाणो सुद्धमणो जो य बंभयारी सो । जम्हाउ लाभचेरं मणोनिरोहो जिणाभिहियं ॥शा उवगए भणियं-वंभयारीहिं मे कर्ज, साहू भणंति-न कप्पइ निग्गंधाणमेयं, चट्टस्स कहियं-लद्धा बंभयारी, न पुण इच्छंति, तेण भणियं-एरिसा चेव परिचत्तलोगवावारा मुणओ भवंति, किंतु पूइएहिवि तेहिं कजसिद्धी होइ, तन्नामाणि लिक्खति, न ताई खुद्दवंतरी अइक्कमति, ततो बंभयारिणो रुइया, मंडलं कयं, साहुनामाणि लिहि-18 याणि, दिसावाला ठविया, न कूवियं सिवाए. पउणा चेडी, धणो साहुमल्लियंतो सद्धो जातो, धम्मोवगारित्ति चेडी मुत्ताजाहलमाला य तस्सेव दिना, एवं अतुरंतेण पावियत्ति सिलोगत्थो, सो एयं सुणिऊण परिणामेइ, अहंपि सदेसं गंतु अतुरंतो* तत्थेव कंचि उवायं चिंतिस्सामि, गतोसदेसं, तत्थ य विजासिद्धा पाणा दंडरक्खा, तेण ते ओलग्गिया, भणति-किं ते अम्हेहिं । कजं?, सिटुं-देवि घडेह, तेहिं चिंतियं-उच्छोभं से देमो जेण राया परिच्चयइ, तेहिं मारी विउबिया, लोगो मरिउमारतो, रण्णा पाणा समादिट्ठा, णासह मारि, तेहिं भणियं-वेसामो, विजाए य देवीवासहरे माणुसहत्यपाया विउबिया, मुहं च [१] UNEducurnimonal For FFU Clu K ajaneibrary.org ~139
SR No.035066
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 2 06 Aavashyak Niryukti evam Vrutti Aagam 40 Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages336
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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