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________________ आगम (४०) [भाग-5] "आवश्यक'- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+वृत्ति:) ३ अध्ययनं [-], नियुक्ति: [७७३-७७६], वि०भा०गाथा -1, भाष्यं [१३७...], मूलं -/गाथा-] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्ति: एवं मलयगिरिसूरिरचिता वृत्ति: प्रत सुत्रांक दीप अनुक्रम कोटालजितो तं वहद, मम्गतो मम सुण्हाई पेरछंति, एवं तेण उबसग्गो उहितोत्तिकाऊण चूद, पच्छा आगतो तहेब, ताहेICआयरक्षि कमलाआयरिया भणंति-किं खंता ! इमं !, सो भणइ-उवसग्गो उद्वितो, आयरिया भणंति-आणेह साडयं, ताहे भणइ-किं थ तवृत्त वृद्धनासाडएण, दिटुंजं दहवं, चोलपट्टगो चेव हवउ, एवं ता सो चोलपट्टयं गेण्हाविओ, पच्छा भिक्खं न हिंडर, आयरिया! याति चिंतंति-एस भिक्खं न हिंडइ, को जाणइ कयाइ किंची भवइ, तत्थ एकल्लओ किं काहिद, अधि एसो निजरंद पायेयधो, तो तहा कीरउ जहा एस भिक्खं हिंडइ, एग आयवेयावच्चं पच्छा परवेयावञ्चंपि काहिइ, एवं चिंतित्ता ॥३९७॥ तत्तोऽणेण सबे साहुणो अप्पसागारियं भणिया-अहं बच्चामि, तुझे एकल्लया समुद्दिसेज्जाह पुरतो खंतस्स, तेहिं पडि-12 स्मयं, ततो संतस्स पुरतो आयरिया भणंति-तुमें खंतरस सम्म बट्टेजह, अहं बच्चामि गाम, एवं गया आयरिया, तेऽवि साहुणो भिक्खं हिंडिऊण सबे एकलया समुद्दिसंति, सो चिंतेइ-ममेस दाहिइ, इमो दाहिद, एकोऽवि तस्स न देइ, ४अण्णो दाहिद एस वराओ किं लभइ !, एवं तस्स न केणइ किंचि दिन्नं, ताहे आसुरुत्तो न किंचि आलवति, चिंतेइ-18 एउ कल ताव मम पुत्तो तो पेक्खह एए जं पावेमि, ताहे विश्यदिवसे आगया आयरिया, ताहे ते भणंति-खंता!! किहते साइहिं वड़िय, ताहे सो भणइ-पुसा ! जइ तुम न होतो तो एकंपि दिवसं न जीवतो, एएवि जे अण्णे मम | पुत्ता ननुगा य तेऽवि न किंचि देंति, ताहे ते आयरिएण समक्खं अंबाडिया, तेऽवि अन्भुवगया, ताहे आयरिया लाभणंति-आणेह भायणाणि, जह अप्पणो खंतस्स पारणयं आणेमि, ताहे सो खंतो भणइ-किं इह मम पुचो हिंडिहिद, लोगप्पगासे न कयाइ हिंडियपुषो, भणइ-अहं चे हिंडामि, ताहे सो अप्पणा खंतो निग्गतो, सो य पुण लद्धिसं JanEttacnction ~217
SR No.035065
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 2 05 Aavashyak Niryukti evam Vrutti Aagam 40 Part 3
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages327
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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