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________________ आगम (४०) प्रत सूत्रांक [H] दीप अनुक्रम [-] [भाग-4] “आवश्यक”- मूलसूत्र - १ (निर्युक्तिः + वृत्तिः) २ अध्ययनं [-], निर्युक्ति: [ ४१४ - ४१५ ], वि० भा० गाथा [-], भाष्यं [ ४३...], मूलं [- /गाथा - ] पूज्य आगमोद्धारकश्री संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र[१]आवश्यकनिर्युक्ति एवंमलयगिरिसूरिरचिता वृत्तिः पोट्रायनिर्युतिः २४१॥ Jan Education In धम्मजिणाओ ती तिहि उ तिच भागपलियऊणेहिं । अपरेहिं समुप्पन्नो पढिपद्वेणं तु कुंबुजिणो ॥ १३ ॥ परियचउग्माएणं कोडीसहस्सूणएण वासाणं । कुंथूओ अरनामा कोडिसहस्सेण मल्लिजिणो ॥ १४ ॥ महिजिनाओ मुणिओवि चउप्पन्न वासलक्खेहिं । सुवयनामाउ नमी लक्खेहिं छहि उ उत्पन्नो ॥ १५ ॥ aft craft and aरिनेमी जिणो समुप्पन्नो । तेसीई सहस्सेहिं सएहिं अट्टमेहिं च ॥ १६ ॥ मीओ पासजिणो पासजिणाओ य होइ वीरजिणो । अड्डाइजसएहिं गएहिं चरिमो समुत्पन्नो ॥ १७ ॥ सभा कोडिलक्स ५०, अजियाओ कोडिलक्स ३०, संभवा कोडिलक्ख १० अभिनंदणा कोडिलक्ख ९, सुमतिओ कोडी उईसहस्सेहिं ९०, पउमध्यभा कोडीण नवसहस्सेहिं ९ सुपासा कोडीनवसएहिं ९००, चंदप्पभा कोडीओ णवती ९०, पुष्कदंता कोडीउ णत्रहि उ ९, सीयला कोडी १ उणा १०० सागर० ६६२६००० वरिसाई, सेजंसा सागरोपम ५४, वासुपुजा तीस सागराई ३० विमला सागरोवमाई ९, अनंता सागरोवमाई ४, धम्मा सागरोवमाई ३ फणाइ परिभागेहिं १, संतिओ पलियर्द्ध, कुंधुओ परियचउन्माओ : ऊणाओ वासकोडीसहस्सेणं १, अरा बासकोडी सहस्स १, मल्लिओ वरिसलक्खचउप्पन्ना ५४, मुणिसुत्रया वरिसलक्ख ६, नमीओ बरिसलक्ख ५, अरिद्वनेमिओ वरिससहस्स ८१७५०, पासा वाससयाई २५० वद्धमाणो जिणंतराई ॥ साम्प्रतं चक्रवर्त्तिनोऽधिकृत्य जिनान्तराज्येव प्रतिपाद्यन्ते तत्र For Pivote & Personal Use Ony ~213~ जिनान्त राषि ॥२४२॥ wsanelibrary.org
SR No.035064
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 2 04 Aavashyak Niryukti evam Vrutti Aagam 40 Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages336
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size29 MB
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