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________________ आगम (४०) [भाग-4] "आवश्यक"- मूलसूत्र अध्ययनं , नियुक्ति: [३०६-३१९], वि०भा गाथा H, भाष्यं [४...], मूलं [- /गाथा-] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र[४०] मूलसूत्र[१]आवश्यकनियुक्ति एवंमलयगिरिसूरिरचिता वृत्ति: उपोदातनियुक्तिः जिनानां प्रत कुमारादिपर्यावः ॥२१॥ सुत्रांक गा.२९९. अहाइजा लक्खा कुमारवासो उ ससिपहे होइ । अछषिप रो पडवीसंगायबोदवा ॥३०॥ पण्णं पुत्वसहस्सा कुमारवासो उ पुष्पदंतस्स । तावइयं रजंमी अट्ठावीसं च पुवंगा ॥ ३०७॥ पणुषीससहस्साई पुराणं सीयले कुमारत्तं । तावइयं परियामओ पन्नासं चेव रजमि ॥ ३०८॥ वासाण कुमार एगवीसं लक्ख होइ सेजंसे । तावइयं परियायो वायालीसं च रजंमि ॥३०९॥ गिहवासे अट्ठारस वासाणं सयसहस्स नियमेणं । चउपन्न सयसहस्सा परियाओ होइ वसुपुज्जे ॥ ३१॥ पन्नरस सपसहस्सा कुमारवासो उ तीसई रजे । पन्नरस सयसहस्सा परियायो होइ विमलस्स ॥ ३११॥ अहमलक्खाई वासाणमणंतई कुमारत्ते । तावइयं परियायो रज्जंमि यहोति पत्नरस ॥ १२॥ . धम्मस्स कुमारत्तं वासाणऽहाइयाई लक्खाई । तावइयं परियाओ रजे पुण होति पंचेच ॥ ३१३ ॥ संतिस्स कुमारत्ते मंडलिचकिपरियाय चउसुंपि। पत्तेयं पत्तेयं वाससहस्साई पणबीसं ॥१४॥ एमेव य कुंथुस्सवि चउमुवि ठाणेसु होंति पत्तेयं । तेवीससहस्साई वरिसाणऽहम सया य ॥ ३१५॥ एमेव अरजिर्णिदस्स चउसुवि ठाणेसु होंति पत्तेयं । एगवीस सहस्साई वासाणं हंति नापचा ॥ ३१ ॥ मल्लिस्सवि षाससयं गिहवासे सेसयं तु परियायो। चउपण्णसहस्साई नव चेव सयाई पुण्णाई ।। ३१७॥ अट्टमा सहस्सा कुमारवासो उ सुखयजिणस्स | तावइयं परियाओ पन्नरस सहस्स रजमि ॥१८॥ नमिणो कुमारवासो वाससहस्साई दोनि अद्धं च । तावइयं परियाओ पंच सहस्साई रज्वमि ॥ ३१९॥ दीप अनुक्रम ॥२१॥ Farve Personal vsanelibrary.com ~1537
SR No.035064
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 2 04 Aavashyak Niryukti evam Vrutti Aagam 40 Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages336
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size29 MB
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