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________________ आगम (४५) भाग-8 “अनुयोगद्वार”- चूलिकासूत्र-२ (चूर्णि:) ................मूलं R] / गाथा ||-11 ............. पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र- [४५, चूलिकासूत्र- [०२] "अनुयोगद्वार" चूर्णि: प्रत सूत्रांक [२] गाथा अनयोग चूर्णी ॥३ 45% ॥ II-II तर णमोकारपरो गुरुं पदक्षिणेत्ता पुरतो ठिच्चा पुणो मणादि-तुब्भेहिं मे अमुग सुतमुद्दिढ़, जोग करेहित्ति संदिवो इच्छामोतिअनुयोग भणित्ता य वंदित्ता य पदक्षिणं करोति, एवं तइयवारपि, एते ततोऽपि वंदणा एक पंदणहाण, ततियपदिक्षण अनुयोते य गुरुस्स पुरतो चिट्ठति, ताहे गुरू णिसोयति, णिसण्णस्स य अद्धावणतो भणाति-तुम्भं पवेदितं संदिसह साहूर्ण पवेदयामि, माथ: गुरू भणति-पवेदेहत्ति, इच्छामोति भणिचा पंचमं देति बंदणं, वंदित्ता पच्चुट्टितो कयपंचणमोकारो छ₹ देति बंदणं, पुणो | वंदितपच्चुद्वितो तुभं पवेदितं साधूण पवेदितं संदिसह करेमि काउस्सर्ग, गुरू भणति-करेहत्ति, ताहे वंदणं देति सत्तम, एते सुतपच्चता सत्त बंदणा, ततो बंदियपच्चुट्टितो भणादि-अमृगस्स उडिसावणं करेमि काउस्सग्गं अण्णत्थ ऊससितण जांव वोसिरामोति, सत्तावीसुस्सासकालं ठिच्चा लोगस्स उज्जोयगरं वा चिंतेता उस्सारेतो भणादि-'णमो अरहताण'ति, | लोगस्सुज्जोअगरे कहिता सुतसमत्तउद्देसकिरियत्तणतो अंते केदी बंदणं देति, जे पुणो बंदणयं देति ते ण सुतपच्चतं, गुरूवकारित्ति धिणयपडिबत्तितो अट्ठमं बंदणं देंति, अंगादिसमुद्दसणेसुवि, वरं समुद्देसे पवेदिते गुरू भणति-थिरपरिजिय करे। हित्ति, णंदीण कड्डिजति ण त पदक्षिण तउबरि कारिज्जति, जेण णिसण्णो गुरू समुद्दिसइ, अंगादिअणुण्णामु जधा उद्देसे तहा सव्वं कज्जइ, णवरं पवेदित गुरू भणति-समं धारय अन्नेसिं च पवेदयसुत्ति, जोगुक्खनुस्सग्गो य ण भवति, आवस्सगादिसु पइन्नएम तंदुलवेयालियादिसु एसेव विधी, पवरं सज्झाओण पट्टावज्जइ जोगुक्खेबुस्सग्गो य ण कीरइ, | सामाइयादिसु अज्झयणेसु उद्देसगेसु य उदिस्समाणेसु चितियवंदणपदीक्खणादिविसेसकिरियवज्जिताई सत्त थोभवद-IM णाई उबक्कमेण भवंति । जया पुण अणुयोगो अणुण्णवइ तता इमो विधी-पसत्थेसु तिहिकरणणक्खसमुहुत्तेसु पसत्थे य खत्ती दीप %25 अनुक्रम लाल [२] - अथ अनुयोग-विधि: प्रदर्शयते ~82
SR No.035058
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 08 Nandi Churni Agam 44 evam Anuyogdwar Churni Aagam 45
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages176
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, agam_nandisutra, & agam_anuyogdwar
File Size14 MB
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