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आगम
(४४)
भाग-8 "नन्दी- चूलिकासूत्र-१ (चूर्णि:)
...............मूलं ४५-५६] / गाथा ||८१...|| ........... पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र- [४४], चूलिकासूत्र- [१] "नन्दीसूत्रस्य चूर्णि:
प्रत
सूत्रांक
नन्दीचूणौं
[४५-५६] गाथा
||८१..||
श्री. वियाहित्ति व्याख्या इह जीवादयो व्याख्यायंते, इह सतंचव अजायणस, गोयमादिएहिं पुढे अपुढे वा जो पहंतवागरणं, सेसं कंन्याशाताचंगनन्दाचूणा | Pा से तं वियाहि ॥' से कि त णाताधम्मकहे ' त्यादि सूत्र (५१-२३०) एगूणवीस णातज्मयणा, णातत्ति आहरणा, विट्ठतियो वा णज्जाश प्रावष्ट पाते गाता, पते पढमसुयखंधे, अहिंसाविलक्खणस्स धम्मस्स कहा धम्मकहा, धम्मियाओ वा कहाओ धम्मकहाओ, अक्खाणगात्ति वुत्तं भवति, 181
एते बितियसुतखंधे, एस धम्मकहाणं वग्गा, वग्गोत्ति समूहो, वव्विसेसणविसिवा दस अजायणा वेते बहुव्वा, एगूणवीसं णाता दस य धम्म
कहातो, तत्थ णातेसु आदिया दस णाता चेव, णेतेसु अक्खाइयादिसंभवो, सेसा णव णाता, तेसु एकेके पाते चत्तालीसं अक्खादियाओ भवंति, लातत्यनि एकेकाए अक्खाइयाए पंच पंच उवक्खाइयसयाई भवंति, सुवि एकोकाए उवक्खाइयाए पंच पंच अक्खाइयउबक्खाइयसयाई |भवंति, एवं एते णव कोडीओ, तामओ धम्मकहासुं सावेतब्वत्तिकाउं एकूणवीसार प्रताणं दसह व धम्मकथाणं विसेसो कज्जा, वस गावा
दसणव धम्मकथाओ, दसहिं परोप्परा सुद्धा, एवं विसेसे कते सेसा णक पाता, ते णाया चतालीसाए गुणिता, जाता तिणि सबा सट्टा | है अक्साइताणं, एते अक्खाइया पंचसहिंतो सोमिता, तत्थ सेसं चचा सते, तं उवक्खाइयपंचसतेहिं गुणित, जाता उबक्खाइयाणं सत्तरि
सहस्सा, ते इहि अक्खाइतोवक्साइयसतेहिं गुणिता, एवं जाया अद्भुट्ठातो अक्खाइयकोडीओ, पदग्गेणति उक्सगपद निवातपदं णामित
पदं अक्खातपर्व मिस्सपदं च, एते पदे अधिकिच्च पंच लक्खा छावत्तरि च सहस्सा पदग्गेणं भवंति, अथवा सुचालावयपदग्गेणं संखज्जाई | 4 पदसहस्साई भवंति, अहवा छोहत्तरावि त सहस्स पंचलक्खावि सोज्जपदसहस्सेहिं ण विरुति, सेस कंठ्यं, 'सेतं णाताधम्मकहाओ। कासे किं तं उवासगदसाओ' इत्यादि सुसं (५२-२३१) 'उवासयत्ति सावता तेसिं अणुब्वयगुणसीलवतोववेसणा दससु अायणेसु अक्खा
तिजति उवासगदसा भणिता, तासु य पदग्गं एकारस लक्खा बावण्णं च सहस्सा पदग्गेणं, सुत्तालावयपदाह संखज्जाणि या पदसहस्साई पद
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दीप अनुक्रम [१३८१४९]
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