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________________ आगम (४५) भाग-8 "अनुयोगद्वार'- चूलिकासूत्र-२ (चूर्णि:) ............मूलं [१४१-१४६] / गाथा ||११२-१२१|| ......... पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र- [४५] चूलिकासूत्र- [२] "अनुयोगद्वार" चूर्णि: प्रत सुत्रांक [१४११४६] श्री अनुयोग। चणा ॥६७ ॥ गाथा ||११२१२१|| | राणं, पुढविआउतेउस्स उवाउवज्जकंठा भणियव्वा । 'वाउकाइयार्ण भंते' इत्यादि, वाउकाइयाणं वेउध्विया बद्धिल्लया असंखज्जा, वायु वनस्पति समए समए अबहीरमाणा पलितोचमस्स असंखज्जहभागमेत्तेणं कालेणं अबहीति, णो चेव णं अबहिया सिता, सूत्र, कहं पुण पलि-31 ताद्वीन्द्रिया| तोवमस्स असंखज्जहभागमेत्ता भवतिी, आयरिय आह-बाउकाइया चउबिहा-मुहुमा पज्जता अपज्जत्ता, बायरावि पज्जत्ता अप-15 दिमानं |ज्जत्ता, तत्थ तिणि रासी पत्तेयं असंखज्जा लोगप्पमाणप्यदेसरासिपमाणमेचा, जे पुण बादरा पज्जता ते पतरासंखज्जतिभाग-1* मेत्ता, तत्थ ताव तिहं रासीणं वेउब्बियलद्धी चेव णत्थि, बायरपज्जताणपि असंखज्जहभागमेवाणं लद्धी अस्थि, जेसिपि लद्धी | अस्थि ततेषि पलितोवमासंखेज्नभागसमयमेत्ता संपदं पुच्छासमए वेउम्बियवत्तिणो, केई भति-सचे वेउब्धिया वायंति, अवेउब्बियाणं वाणं व ण पवत्तति, तं ण जुज्जति, किं कारणं ,जेण सम्बेसु चेव लोगागासादिमु चला वायवो विज्जति, तम्हा अवेउवितावि वायंतीति घेत्तव्यं, सभावो तेसिं वाइयब्बं । 'वणप्फडकादियाणं' इत्यादि कंठ्यं, 'बेइंदियाणं भंते!' इत्यादि, बेइंदियोरालिया बद्धेल्लया असंखेज्जाहि उस्सप्पिणीअवसप्पिणीहिं कालप्पमाणं तं चेव खेत्ततो असंखेज्जाओ सेढीओ तहेव पयरस्स असंखेज्जतिभागो केवल विक्वंमसीए विसेसो, विक्खंभसूयी असंखेज्जाओ जोयणकोडाकोडीओत्ति विसेसितं परं परि-। |संखाणं, अवा इदम बिसेसियतर-असंखज्जसढीवग्गमूलाई, किं भणितं होति, एकेकाए सेटिए जो पदेसरासी तस्स पढमटू वगमूल वितियं जाव असंखज्जाई वग्गमूलाई संकलियाई जो पदेसरासी भवति तप्पमाणा विक्खंभसूयी इंदियाण निदरिसणं पास ६७॥ सेढी पंचट्टि सहस्साई पंच सताई छत्तीसाणं पदेसाणं, तीसे पढम बग्गमूलं विसता छप्पण्णा वितिय सोलस ततियं चत्वारि चउत्थं दोष्णि एवमेताई वग्गमूलाई दो सता अट्ट सत्तरा भवति, एवइया पदेसा तासि सेढीण विक्खंभसूयी, एतेवि सम्भावओ असं-16 दीप अनुक्रम [२९२३१४] ~1464
SR No.035058
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 08 Nandi Churni Agam 44 evam Anuyogdwar Churni Aagam 45
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages176
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, agam_nandisutra, & agam_anuyogdwar
File Size14 MB
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