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________________ आगम (४५) भाग-8 "अनुयोगद्वार'- चूलिकासूत्र-२ (चूर्णि:) .............मूलं [१३१-१३४] / गाथा ||८३-९९|| ........... पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र- [४५] चूलिकासूत्र- [२] "अनुयोगद्वार" चूर्णि: प्रत सूत्रांक [१३११३४] गाथा ||८३ ॥५३॥ ९९|| सतंयुलप्पमाणतो जे' हीणा वा ' गाथा (१९८--१५७) सचमेव सारः सत्त्वसारः अथवा देहे सुभपोग्गलोवचयत्वं सारः एवमा- आत्माअनुयागादिपुरिसाणं आयंगुलं, वावी चतुरस्सा, वृत्ता पुक्खरणी पुष्करसंभवातो वा, सारणी रिजु दीहिया सारणी एवं वंझा गुंजालिया सर-II गुलं चूर्णी मग तीए पंतिट्टीया दो सरातो सर कवाडयेण उदगं संचरइनि सरपंती, विविध रुक्खलतोवसाभितं कदलादिपच्छण्णघरेसु य | पासावीसभियाण रमणट्ठाणं आरामो, पत्तपुप्फफलछायोवगादिरुक्खुवशोभितं बहुजणविविहवेसुण्णयमाणस भोयणढा जाणं उज्जाणं, इत्थीण पुरिसाण वा एगे पक्खे भोज्जं जंतं काणणं, अहवा जस्स परतो पव्वयमडवी वा सब्बवणाण य अंते वणांत काणण, दिशीणों वा, एगजातियरुक्खेहि वर्ण, अणेगजातीएहि उत्तमेहि य वणसंडे, एगजादियअणेगजातियाण बा रुक्खाण पती वणराई, अहो संकुडा उपरि विशाला फरिहा समखाता खाइया अंतो पागाराणं अंतरं, अट्ठहत्थो रायमग्गो चरिया, दुहं दुवाराण अंतरे गोपुरं, तिको णामागासमूमि तिपहसमागमो, संघाडगं तिपहसमागमो चेव, तियचतुरंसं चतुप्पहसमागमो चेत्र चच्चरं छप्पह। समागम वा एवं छच्चर भण्णति, देउलं चतुमुह, महतो रायमग्गो महाप्पधो इतरे पहा, सत् सोभणाबिहुजं भयंते पोस्थगवायणं वा जत्थ सामन्नतो वा मणुयाणं अच्छणहाण सभा, जत्थुदकं दिज्जति सा पवा, बाहिरालिंदो सुकिधी अलिंदो वा सरणं, गिरिगुहा लेणं पब्बयस्सेगदसलीणं वा लयण, कप्पडिआ वा जत्थ लयंति तं लयण, भंडं-भायणं तं च मृन्मयादि मात्रो-मात्रायुक्तो सो य कसभायणादि भोयणभंडिका, उबकरणं पुण अणेगविहं कडगपिडगसुप्पादिकं, अहवा उवकरणं इमं सकडरहादियं, तत्थ रहोत्ति ४ जाणरथो संगामरथो य, संगामरहस्स कडिप्पमाणा फलयवेड्या भवति, जाणं पुण गडिमाईयं, गोल्लविसए जंपाणं द्विहत्थमात्रं चतुर-17 सं सवेदिकमुपसोभितं, जुग्गय लाडाणं थिल्ली जुगर्य, हस्तिन उपरि कोल्लरं गिलतीच मानुषं गिली लाडाणं जै अडपल्लाणं तं अण्ण NEKAR दीप अनुक्रम [२३५२६९] ~132
SR No.035058
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 08 Nandi Churni Agam 44 evam Anuyogdwar Churni Aagam 45
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages176
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, agam_nandisutra, & agam_anuyogdwar
File Size14 MB
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