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________________ आगम (४५) भाग-8 "अनुयोगद्वार- चूलिकासूत्र-२ (चूर्णि:) ....................मूल R०-९७] / गाथा ||९|| ........... पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र- [४५] चूलिकासूत्र- [०२] "अनुयोगद्वार" चूर्णि: प्रत सूत्रांक It भद्राः चूर्णा [९०-९७] गाथा ||९|| #सया अपाणुपुच्चीण भवति, तोर्सि आणणावायो इमो-' पुवाणुपुबिहेडा' सधा 'पुवाणुपुव्यि हेट्ठा समयामेदेण कृण जहाजेहूं । अनानुपूर्वी अनुयोग | उबरिमतुलं पुरओ णसेज्ज पुवकमो सेसे ॥१॥ पुच्चाणपुवित्ति व्याख्या पूर्ववत्, हेवित्ति--पढमाए पुण्यापुग्विलताए, अहो भंगरयणं वितियादिलतासु, समया इति इह अणाणुपुत्रिभंगरयणव्यवस्था समयो तं अभिंदमाणोति तं मंगरयणअवस्थं अविणासे॥ ३१॥ त माणो, तस्स य विणासो जति सरिसंक एगलताए ठवेति, जति व ततिय लक्षणातो उबकमेण पट्टवेति ता भिण्णो समयो, तं भेद अकुबमाणो, कुणमु 'जधाजेहूँ' ति जो जस्स आदीए स तस्स जेट्ठो भवति, जहा दुगस्स एगों जेट्ठो, अणुजट्टो तिगस्स एको,3 जेट्ठाणुजेट्टो जहा चउकस्स एको, अतो परं सब्वे जेट्ठाणुजेट्ठा भाणितब्धा, एतेसिं अण्णतरे ठविते पुरतोत्ति-अग्गतो उवरिमे अंके ठवेत्ता जेट्ठाति अंकतो पुच्चाकमेण हुयेति, जो जस्स अणंतरो परंपरो वा पुथ्वो अक्षो स पुच्च ठवेज्ज अतो पुन्बकमो भणतीत्यर्थः, अहवा अणाणुपुब्बीणमायरणविधी-पुष्याणुपुष्वीइच्छित जति वष्णा ते परोप्परम्भत्था । अंतहियभागलद्धा वोच्चत्थंकाण ठाणते ।।१।। आदित्थेसुवि एवं जे जत्थ ठिता य ते तु बज्जेज्जा । सेसेहि य वोच्चत्वं कमुकमा पूर सरिसेहि ॥२॥ भागहितलठवणा दुगादि एगुत्तरेहि अब्भत्था । सरिसंकरयणठाणा तिगादियाणं मुणेयव्वा ॥३॥ पढमदुगट्ठाणेसु जवादितिगेण अत्तदिडूतो । अणुलोम पडिलोमं पूरे सेसेहि उवउत्तो ॥४॥ 'अहवा तिचिहा दब्याणुपुथ्वी' त्यादि (९८-७७) परमाणुमादिसु तिविहावि मुत्तसिद्धा, सिस्सो आह-कि पत्तेयं पुरंगलेमु तिविहा उपणिही दंसिता ण धम्मादिएसु?, आचार्याह-धम्माधम्मागासाण पत्तेयमेगदश्चत्तणतो अणुपुब्बिमादि ण घडति, जीवडिकाएवि सबजीवाण तुल्लपदेसत्तणतो एगादिएगुत्तरखुड्डा णस्थिति, अहवाऽवगाहेण विसेसो | होज्ज, तत्थवि आणुपुष्यी चेव, णो अणाणुपुथ्वीअवत्तबगाई, ठितिकालस्सबि एगसमयत्तणत्ताभावतो नोक्ता इत्यर्थः, पुग्गलेस २१ ॥ दीप अनुक्रम [१०१११०] ~110
SR No.035058
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 08 Nandi Churni Agam 44 evam Anuyogdwar Churni Aagam 45
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages176
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, agam_nandisutra, & agam_anuyogdwar
File Size14 MB
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