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________________ आगम (४०) भाग-5 "आवश्यक- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 3 अध्ययनं [४], मूलं [सूत्र /११-३६] / [गाथा-१,२], नियुक्ति : [१२४३-१४१५/१२३१-१४१८], भाष्यं [२०५-२२७] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिताचूर्णि: 3 प्रत सूत्रांक [सू.] + गाथा: ||१२|| प्रतिक्रमणा यस्स एसणासमियस्स आयाणगंडमत्तणिक्खेवणासमितस्स उच्चारपासवणखलसिंघाणजल्लपारिट्ठावाणयासमियस्स मणसमियस्स भूतग्रामा: ध्ययने | वहसमियस्स कायसमियस्स मणगुत्तस्स वइगुत्तस्स कायगुत्तस्स गुत्तस्स गुनिदियस्स गुत्वंभचारिस्स आउत्तं गच्छमाणस्स वा ॥१३॥ चिट्ठमाणस्स वा निसीयमाणस्स वा तुयट्टमाणस्स वा आउचं भुंजमाणस्स वा आउत्तं वत्थ पडिग्गह कंवलं पादपुंछणं गेण्हमाणस्स। वा निक्खिवमाणस्स चा जाब चक्लुपम्हनिवायमवि अस्थि वेमाता सुहुमा किरिया ईरियावहिया कज्जति, सा पढमसमये बद्ध| पुट्ठा बितियसमये वेदिता ततियसमये निज्जिण्णा, सा बद्धपुट्ठा उदिता वेदिता निज्जिण्णा, सेअकाले अकमि वावि भवति । एवं खलु तस्स तप्पत्तियं असावज्जति आहिज्जति,तेरसमे किरियट्ठाणे इरियावहियवत्तिएत्ति आहिते १३||से बेमि जे अतीता जे | पडुप्पण्णा जे आगमेस्सा अरिहंता भगवंतो सब्बे ते एताई तेरस किरियाठाणाई भासिसु वा भासंति वा भासिस्संति वा, एवं पणविसु ३, एवं चेव तेरसम किरियाठाणं सेविसु ३, एत्थ पडिसिद्धकरणादिना जो मे जाव दुक्कडति ।। | चोद्दसहिं भूतगामेहिं।।सूत्र।जिम्हा भुवि भविस्सति भवति य तम्हा भूतत्ति वत्तव्बा,भूता-जीवा गामोत्ति समूहो,भूताणं गामा साभूतग्गामा तत्थ,तहिं गाथा-एगिदिय सुहुमितराणाएगिदिया सुहुमा इतरा-बादरा,सुहमा पज्जत्ता अपज्जत्ता य,एवं बादरावि दुविहा, बेदियावि दुविहा-पज्जता अपज्जत्ता य,तेंदियावि दुविहा,चउरिदिया दुविहा,पंचिदिया दुविधा-सण्णिणो असण्णिणो य, तत्थ असण्णिपंचिंदियावि दुविधा- पज्जत्ता अपज्जत्ता, सण्णिपंचिदियावि दुविधा- पज्जत्ता अपज्जचा य, एते चोइस भूतग्गामा, | IR॥१३२॥ | एत्थ पडिसिद्धकरणादिणा जो मे जात्र दुक्कडेति । 334555 दीप अनुक्रम [११-३६] (145)
SR No.035055
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 06 Aavashyak 3 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages343
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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