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________________ आगम (४०) प्रत सूत्रांक H दीप अनुक्रम H भाग-3 “आवश्यक”- मूलसूत्र-१ (निर्युक्तिः+चूर्णि:) 1 निर्युक्तिः [२७०-/४४४-४५८] भाष्यं [४६-७८ ] मूलं [- /गाथा ], अध्ययनं [-] पूज्य आगमोद्धारकश्री संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र - [४०],मूलसूत्र-[०१] आवश्यकनिर्युक्तिः एवं जिनभद्रगणिरचिता चूर्णि:-1 श्री आवश्यक चूर्णे उपो षात नियुक्तौ ॥२४७॥ रिसा से केसा कविला तेण दिप्पमाणा महल्ले उदियकमल्ल सरिसोवमे णिडाले मुगुसपुच्छं व तस्स भुमुगाओ कविलजडिलाओ बिसतबीमच्छं दसणाओ सीसघडी व उन्भडा, तस्स दोषि णयणा विणिग्गया विगतदंसणिज्जा कन्ना जह सुप्पकप्परं चैव बिगतीभच्छदंसणिजा, उरम्भपुडसंठिता से पासा खुसिरा इव जमलभुसिंठाणसंठिता दोवि पासिकपुडा महल्लकुब्वरगसंठिता तस्स दो कबोला, घोडगपुंछंव कबिलजाडलाओ उडलोमाओ दाढियाओ उड्डा से घोडगस्स जह दोषि लंबमाणा पासुफालसरिसा से दंता पास जिन्भा हिंगुलुगधातुकंदरबिलंय तस्स व्यर्ण, हलकुंडगसंठिता तस्स होति हणुगा, गल्लकडिल्लं व तस्स खेडं फुद्धं कविलफरुसं महल्ले, मुगागारोवमा से खधा, कोडियसंठाणसंठिता दोषि तस्स वाहा, सुक्खदयसंठाणसंठिया से हत्था, पीसालोढगसरिसा य तस्स हत्थेसु अंगुलीओ, सप्पिणीपुडसंठिता से गहा, अडवालगसंठितोदरो तस्स लोमविलो, विगता व्हावगपस्सेव उच्चे उदरंमि तस्स लंपति दोषि थणगा, कोथलसरिसोबमो से मज्झे पोई, अपकोडगोन्द बट्टा पाणी लंदसरिसोबमा से णाभि ओडियलतबद्धपोट्टे भग्गकडी विगते य पंकपट्टी असरिससरिसा य तस्स दोषि फिडगा कि पुडगसंठिया से वसणा जंतसिवगसंठाणसंठित से नेते कोत्थलसरिसोवमा से ऊरू पिडगमूलसरिसाणि तस्स जाणूणि कुडिलकुटिलाणि विगययीभत्थदंसणाणि, जंघा से कक्खडीओ लोमेहिं उवचियाओ णीसापासाणसरिगा तस्स दोsवि पाया पीसालोडेण सरिसगा तस्स पाएस अंगुलीओ सप्पिणी पुडसंठिता से णक्खा, कोसी मुहसरिसतिक्खणक्खे जिसमे लंबोदरपलंबे विगते बीभच्छभग्गभूमए मसिमसामहिसकालए भरितमेहवने लंबोट्टे णिग्गयग्गदंते निहालियजमलजुगलजीहे आऊसितवयणगंडदेसे तहवीणविचिङफुग्गणासे विगते तहस्सुग्गभग्गनुमए खज्जोवगदित्तचक्खुरागे भिगुडी कुडिलंतलोयणे दित्तअट्टहासे उत्ता [259] वृद्धी देवकृता धैर्यपरीक्षा ॥२४७॥
SR No.035053
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 04 Aavashyak 1 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages320
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size25 MB
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