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दशाश्रुत. छेदसूत्र अन्तर्गत
“कल्पसूत्रं (बारसासूत्र) (मूलम्) .......... मूलं- सूत्र.[१९१] / गाथा.||-|| ............. मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित....."कल्प(बारसा)सूत्रम्" मूलम्
बारसो
प्रत सूत्रांक/ गाथांक [१९१]
कल्प - धम्मस्स णं अरहओ जाव सबदुक्खप्पहीणस्स तिणि सागरोवमाई विइक्वंताई. । ४४ ॥ पन्नादि च, सेसं जहा मल्लिस्स ॥ १९१ ॥ १५॥
अणंतस्स णं अरहओ जाव सबदुक्खप्पहीणस्स सत्त सागरोवमाई विइकंताई। पन्नटुिं च, सेसं जहा मल्लिस्स ॥ १९२॥ १४॥
विमलस्स णं अरहओ जाव सबदुक्खप्पहीणस्स सोलस सागरोवमाई विकंताई. पन्नाठिं च, सेसं जहा मल्लिस्स ॥ १९३॥१३॥
वासुपुजस्स णं अरहओ जाव सवदुक्खप्पहीणस्स छायालीसं सागरोवमाइं विइक्कंताई पन्नटुिं च, सेसं जहा मल्लिस्स ॥ १९४ ॥ १२॥ ६ सिजंसस्स णं अरहओ जाव सवदुक्खप्पहीणस्स एगे सागरोवमसए विइक्वंते
पन्नटुिं च, सेसं जहा मल्लिस्स ॥ १९५॥ ११॥ .
दीप अनुक्रम [१८७]
V
॥४४॥
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