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________________ दशाश्रुत० छेदसूत्र अन्तर्गत प्रत सूत्रांक/ गाथांक [१२७] दीप अनुक्रम [१३३] “कल्पसूत्रं (बारसासूत्रं) (मूलम्) मूलं- सूत्र. [१२७] / गाथा || || मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित ......"कल्प ( बारसा) सूत्रम्" मूलम् भगवं महावीरे कालगए जाव सधदुक्खप्पहीणे, तं स्यणिं च णं नवमल्लई नवलेच्छई कासीकोसलगा अट्ठारसवि गणरायाणो अमावासाए पारा भोयं पोसहोववासं पट्टविंसु, गए से भावुजोए, दबुजोअं करिस्सामो ॥ १२७ ॥ जं रयणिं च णं समणे जाव सवदुक्खप्पहीणे, तं रयणिं च णं खुद्दार भासरासी नाम महग्गहे दोवाससहस्सठिई समणस्स भगवओ | महावीरस्स जम्मनक्खत्तं संकंते ॥ १२८ ॥ जप्पभिई च णं से खुद्दाए भासरासी मह - ग्गहे दोवाससहस्सठिई समणस्स भगवओ महावीरस्स जम्मनक्खत्तं संकंते, तप्पभिनं चणं समणाणं निग्गंथाणं निग्गंथीण य नो उदिए २ पूआसक्कारे पवत्तइ ॥ १२९ ॥ जया णं से खुद्दाए जाव जम्मनक्खत्ताओ विइकंते भविस्सइ, तया णं समणाणं निग्गंथाणं निग्गंथीण य उदिए २ पूआसक्कारे भविस्सइ ॥ १३० ॥ जं स्यणिं च णं समणे १ बाराभोए (क० कि० ) ~80~
SR No.035040
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 40 Kalpsutra Moolam Chatusharan Tandulvaicharik Gacchachar Mool evam VruttiMool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages394
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_kalpsutra
File Size105 MB
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