________________
दशाश्रुत छेदसूत्र अन्तर्गत
“कल्पसूत्रं (बारसासूत्र) (मूलम्) ............ मूलं- सूत्र.[६२] / गाथा.||-|| .............. मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित......"कल्प(बारसा)सूत्रम्" मूलम्
प्रत सूत्रांक/ गाथांक
कल्प० लोए अणेगगणनायगदंडनायगराईसरतलवरमाडंबिअकोडंबिअमंतिमहामंतिगणगदोवा॥ १९॥ रियअमञ्चचेडपीढमद्दनगरनिगमसिट्ठिसेणावइसत्थवाहदूअसंधिवाल सद्धिं संपरिखुडे धव
लमहामेहनिग्गए इव गहगणदिप्पंतरिक्खतारागणाण मज्झे ससिव पिअदंसणे नरवई 8/नरिंदेनरवसहे नरसीहे अब्भहिअरायतेअलच्छीए दिप्पमाणे मजणघराओ पडिनिक्खमइ
॥६२॥ मज्जणघराओ पडिनिक्खमित्ता जेणेव बाहिरिआ उवाणसाला तेणेव उवागच्छइ, उवागच्छित्ता सीहासणंसि पुरत्थाभिमुहे निसीअइ, निसीइत्ता अप्पणो उत्तरपुरच्छिमे दिसीभाए अट्र भद्दासणाई सेअवत्थपच्चुत्थयाइं सिद्धत्थयकयमंगलोवयाराइं रयावेइ, रयावित्ता अप्पणो अदूरसामंते नाणामणिरयणमंडिअं अहिअपिच्छणिजं महग्यवरपट्टणुग्गयं सहपट्टभत्तिसयचित्तताणं ईहामिअउसमतुरगनरमगरविहगवालगकिन्नररु
१ पुरथिमे (क० कि०)
SESESSA365***
[६२]
ESC-
SSAGAR
अनुक्रम [६४॥
॥१९॥
*
*
~49~