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[२८-वृ] श्री तन्दुलवैचारिक (प्रकीर्णक) सूत्रम्
नमो नमो निम्मलदंसणस्स
पूज्य श्रीआनंद-क्षमा-ललित - सुशील-सुधर्मसागर गुरुभ्यो नमः
“तन्दुलवैचारिक” मूलं एवं अवचूर्णि:
[मूलं एवं विजयविमल गणि विवृत्ता अवचूर्णि:]
[आद्य संपादकश्री]
पूज्य आगमोद्धारक आचार्यदेव श्री आनंदसागर सूरीश्वरजी म. सा. (किञ्चित् वैशिष्ठ्यं समर्पितेन सह )
पुन: संकलनकर्ता मुनि दीपरत्नसागर (M.Com., M.Ed., Ph.D., श्रुतमहर्षि)
28/07/2017, शुक्रवार, २०७३ श्रावण शुक्ल ५
‘सवृत्तिक-आगम-सुत्ताणि श्रेणि भाग-40
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श्री आगमोद्धारक - वाचना- शताब्दी वर्ष - निमित्त 'आगम-वृत्ति - मुद्रण- प्रोजेक्ट'
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