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दशाश्रुत०
छेदसूत्र अन्तर्गत
प्रत
सूत्रांक/
गाथांक
[४५]
दीप
अनुक्रम
[३११]
“कल्पसूत्रं (बारसासूत्रं) (मूलम्)
मूलं- सूत्र. [४५] / गाथा ||-|| मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित ...... "कल्प ( बारसा) सूत्रम्" मूलम्
कल्प०
अंडमुहुमे ६ ॥ से किं तं लेणसुहुमे ? लेणसुहुमे पंचविहे पण्णत्ते, तंजहा - उत्तिंगलेणे, ॥ ६५ ॥ भिंगुलेणे, उज्जुए, तालमूलए, संबुक्कावट्टे नामं पंचमे, जे निग्गंथेण वा निग्गंथीए वा जाणिवे जाव पडिलेहियवे भवइ । से तं लेणमुहुमे ७ ॥ से किं तं सिणेहमुद्दुमे ? सिहसुहुमे पंचविहे पण्णत्ते, तंजहा - उस्सा, हिमए, महिया, करए, हरतणुए । जे छउ - | मत्थेणं निग्गंथेण वा निग्गंथीए वा अभिक्खणं २ जाव पडिलेहियवे भवइ । से तं सिणे - हसुहुमे ८ ॥ ४५ ॥ वासावासं पजोसविए भिक्खू इच्छिजा गाहावइकुलं भत्ताए वा पाणाए वा निक्खमित्त वा पविसित्तए वा, नो से कप्पइ अणापुच्छित्ता आयरियं वा उवज्झायं वा थेरं पवित्तिं गणि गणहरं गणावच्छेअयं जं वा पुरओ काउं विहरइ, कप्पर से आपुच्छिउं आयरियं वा जाव जं वा पुरओ काउं विहरइ - 'इच्छामि णं भंते तुब्भेहिं अब्भणुण्णाए समाणे गाहावइकुलं भत्ताए वा पाणाए वा निक्खमि० पवि सि०
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बारसो
।। ६५ ।।