SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 137
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ दशाश्रुत० छेदसूत्र अन्तर्गत प्रत सूत्रांक/ गाथांक [३७] दीप अनुक्रम [ ३००] “कल्पसूत्रं (बारसासूत्रं) (मूलम्) मूलं- सूत्र. [३७] / गाथा ||-|| मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित ...... "कल्प ( बारसा) सूत्रम्" मूलम् कल्प० ॥ ३७ ॥ तत्थ नो कप्पइ एगस्स निग्गंथस्स एगाए य निग्गंथीए एगयओ चिट्टित्तए १, ॥ ६३ ॥ तत्थ नो कप्पइ एगस्स निग्गंथस्स दुण्हं निग्गंथीणं एगयओ चिट्ठित्तए २, तत्थ नो कप्पइ दुण्हं निग्गंथाणं एगाए य निग्गंथीए एगयओ चिट्टित्तए ३, तत्थ नो कप्पइ दुण्हं निग्गंथाणं दुहं निग्गंथीण य एगयओ चिट्ठित्तए ४ । अस्थि य इत्थ केइ पंचमे खुड्डए वा खुड्डिया इ वा अन्नेसिं वा संलोए सपड़िदुवारे एव हं कप्पइ एगयओ चिट्ठित्तए ॥ ३८ ॥ वासावासं पज्जोसवियस्स निग्गंथस्स गाहावइकुलं पिंडवायपडियाए अणुपविट्टस्स निगिज्झिय २ वुट्टिकाए निवइजा, कप्पर से अहे आरामंसि वा अहे उवस्तयंसि वा उवागच्छित्तए, तत्थ नो कप्पइ एगस्स निग्गंथस्स एगाए य अगारीए एगयओ चिट्ठित्तए, एवं चभंगी । अस्थि णं इत्थ केइ पंचमए थेरे वा थेरिया वा अन्नेसिं वा संलोए सपड़िदुवारे, एवं कप्पइ एगयओ चिट्टित्तए । एवं चैव निग्गंथीए ॥ ६३ ॥ ~ 137~ बारसो
SR No.035040
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 40 Kalpsutra Moolam Chatusharan Tandulvaicharik Gacchachar Mool evam VruttiMool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages394
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_kalpsutra
File Size105 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy