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दशाश्रुत०
छेदसूत्र अन्तर्गत
प्रत सूत्रांक/
गाथांक
[?]
दीप
अनुक्रम [२६४]
334
करूप०
“कल्पसूत्रं (बारसासूत्रं) (मूलम्)
मूलं- सूत्र. [१] / गाथा ||-||
मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित ...... "कल्प ( बारसा) सूत्रम्" मूलम्
विइक्कंते वासावासं पज्जोसवेइ ॥ १ ॥ से केणट्टेणं भंते! एवं बुच्चइ 'समणे भगवं महावीरे ॥ ५८ ॥ + वासाणं सवीसइराए मासे विइकंते वासावासं पज्जोसवेइ ? जओ णं पाएणं अगारीणं अगाराई कडियाई उक्कंपियाई छन्नाई लित्ताइं गुत्ताई घट्टाई मट्ठाई संपधूमियाई खाओदगाई खायनिद्धमणाई अप्पणो अट्टाए कडाईं परिभुत्ताइं परिणामियाई भवंति से तेणट्टेणं एवं बुच्चइ 'समणे भगवं महावीरे वासाणं सवीसइराए मासे विइकंते वासावासं पञ्जोसवेइ ॥ २ ॥ जहा णं समणे भगवं महावीरे वासाणं सवीसइराए मासे विइक्कंते वासावासं पजोसवेइ, तहा णं गणहरावि वासाणं सवीसइराए मासे विकते वासावासं पज्जो - | सविंति ॥ ३ ॥ जहा णं गणहरा वासाणं सवीसइराए जाव पज्जोसविंति तहा णं गणहरसीसाचि वासाणं जाव पजोसविंति ॥ ४ ॥ जहा णं गणहरसीसा वासाणं जाव पजोसर्विति, तहा णं थेरावि वासावासं पजोसविंति ॥ ५ ॥ जहा णं थेरा वासाणं जाव पञ्जो -
सामाचारी- वर्षावास (चातुर्मास) - दिवसानाम् मर्यादा-कथनं
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बारसो
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