________________
दशाश्रुत०
छेदसूत्र अन्तर्गत
प्रत सूत्रांक/
गाथांक
[२१६]
दीप
अनुक्रम [२०९]
कल्प०
॥ ४८ ॥
“कल्पसूत्रं (बारसासूत्रं) (मूलम्)
मूलं सूत्र. [२१६] / गाथा.|| || मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित....."कल्प ( बारसा) सूत्रम्" मूलम्
| समणोवासगसंपया हुत्था ॥ २१६ ॥ उसभस्स णं० सुभद्दापामुक्खाणं समणोवासियाणं पंचसयसाहस्सीओ चउपण्णं च सहस्सा उक्कोसिया समणोवासियाणं संपया हुत्था ॥ २१७ ॥ उसभस्स णं० चत्तारि सहस्सा सत्तसया पण्णासा चउद्दसपुवीणं अजिणाणं जिणसंकासाणं जाव उक्कोसिया चउद्दसपुविसंपया हुत्थां ॥ २१८ ॥ उसभस्स णं नव सहस्सा ओहिनाणीणं उक्कोसिया ० ॥ २१९ ॥ उसभस्स णं वीससहस्सा केवलनाणीणं | उक्कोसिया ० ॥ २२० ॥ उभस्स णं० वीससहस्सा छच्च सया वेडव्वियाणं० उक्कोसिया ० ॥ २२१ ॥ उसभस्स णं० बारस सहस्सा छच्च सया पण्णासा विउलमईणं अड्डाइजेसु दीवसमुद्देसु सन्नीणं पंचिंदियाणं पञ्जतगाणं मणोगए भावे जाणमाणाणं पासमाणाणं उक्कोसिआ विउलमइसंपया हुत्था ॥ २२२ ॥ उसभस्स णं० बारस सहस्सा छच्च सया
१ दीवेसु दोसु अ समुद्देसु (क० कि०, क०सु० )
~ 107~
बारसो
॥ ४८ ॥