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________________ आगम (४०) [भाग-३१] "आवश्यक"- मूलसूत्र-१/४ (मूलं+नियुक्ति:+वृत्ति:) अध्ययनं [६], मूलं [.] / [गाथा-], नियुक्ति : [१५६१...] भाष्यं [२४३...], प्रत सूत्रांक त सबलोगो आढाति, कत्तिओ नाढाति, ताहे से सो गेरुओ पओसमावण्णो छिद्दाणि मग्गति, अण्णया रायाए निम-16 तिओ पारणए नेच्छति, बहुसो २ राया निमंतेइ ताहे भणइ-जइ नवरं मम कत्तिओ परिवेसेइ तो नवरं जेमेमि. राया भणइ-एवं करेमि, राया समणूसो कत्तियस्स घरंगओ, कत्तिओभणइ-संदिसह, राया भणति–ोरुयस्स परिवेसेहि, कत्तिओ भणति-न वह अम्हं, तुम्ह विसयवासित्ति करेमि, चिंतेइ-जइ पपइओ होतो न एवं भवंत, पच्छा णेण परि वेसियं, सो परिवेसेजतो अंगुलिं चालेति, किह ते ?, पच्छा कत्तिओ तेण निधेषण पवइओ नेगमसहस्सपरिवारो मुणिसुवयसमीये, वारसंगाणि पढिओ, वारस वरिसाणि परियाओ, सोहम्मे कप्पे सको जाओ, सो परिवायओ तेणाभिओगेण आभिओगिओ एरावणो जाओ, पेच्छिय सकं पलाओ, गहि सको विलग्गो, दो सीसाणि कयाणि, सक्कावि दो जाया, एवं जावइयाणि सीसाणि विउबति तावतियाणि सको विउबति सक्करूवाणि, ताहे नासिउमारद्धो, सर्वलोक सादियते, कालिको नायिते, तदा तसौ स गैरिकः प्रदूषमापाभिमागि मार्गपति, अन्यथा राक्षा निमश्रितः पारण छति, यहशोर राजा निमन्त्रयति तदा भणति-यदि पर कार्तिक मा परिवेषयति सहि नवरं जेमाभि, राजा भणति-एनं करोमि, राजा समनुष्यः कार्तिकस्य गृहं गतः। कार्तिको भति-संदिषा, राजा भणति-गरिक परिवेषय, कात्तिको भणति- वर्ततेऽस्माकं, युष्मद्विपवधासीति परोमि, चिन्तयति-यदि प्रमजितोऽभविष्य नवमभविष्यत, पबादनेन परिवेषितं, स परिवेष्यमाणोऽनुलिपालपति, कथं तय, पचात् कार्तिकस्सेन निवेदन प्रमजितो नैगमसहसपरिवारो मुनिसुव्रत, समीपे, द्वादशाकानि पठितः, हाया वर्षाणि पर्यायः, सौधर्मे करूपे पाको जातः, स परिवाद तेनाभियोगेनानियोगिक ऐरावणो जाता, रष्ट्राचा पला. यित्ता गृहीत्वा शको जिलमा शीर्ष कृते, शकौ अपि ही जाती, एवं थावन्ति शीपाणि विकृर्वति तावन्तिः शक्ररूपाणि विकृर्षति भाका, सदानंष्टमारम्भः, दीप अनुक्रम [६३] JABERamARI Indinrayog पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[४०] मूलसूत्र-[१] आवश्यक मूलं एवं हरिभद्रसूरि-रचिता वृत्ति: ~312
SR No.035031
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 31 Aavashyak Mool evam Vrutti Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages426
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size90 MB
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