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________________ आगम (१८) “जम्बूद्वीप-प्रज्ञप्ति” – उपांगसूत्र-७ (मूलं+वृत्ति:) वक्षस्कार [४], ------------------ ------------------------------- मूलं [८८] + गाथा: पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[१८]उपांगसूत्र-[७] "जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति" मूलं एवं शांतिचन्द्र विहिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [८८] श्रीजम्बू पर्वत गाथा: दीप अनुक्रम [१४३-१४५] - मूलप्रासादेन सह सर्वसंख्यया पश्चाशीतिः प्रासादाः ८५, अथात्र सभापञ्चकं प्रपंचयितुकामः सुधा-श ४वक्षस्कारे द्वीपशान्तिचन्द्री-18 सभास्वरूप निरूपयति-तेसि ण'मित्यादि, तयोर्मूलप्रासादावतंसकयोरुत्तरपूर्वस्यां-ईशानकोणेऽत्रैतस्मिन् भागे। यमकयोदेवयोग्ये सुधर्मे नाम सभे प्रज्ञप्ते, सुधर्माशब्दार्थस्तु सुष्टु-शोभनो धर्मो-देवानां माणवकस्तम्भवति-80 | सू.८८ ॥३२२॥ जिनसक्थ्याशातनाभीरुकत्वेन देवाङ्गनाभोगविरतिपरिणामरूपो यस्यां सा तथा, वस्तुतस्तु सुष्टु-शोभनो धौ-11 राजधर्मः समन्तुनिमन्तुनिग्रहानुग्रहस्वरूपो यस्यां सा तथा, ते चार्द्धत्रयोदशयोजनाम्यायामेन सक्रोशानि पर | योजनानि विष्कम्भेन नवयोजनान्यूर्वोच्चत्वेन, अत्र लाघवार्थ सभावर्णकसूत्रमतिदिशति, अनेकस्तम्भशतसन्निविष्टे 18 इत्यादिपदसूचितः सभावर्णको जीवाभिगमोक्तो ज्ञेयः, स चैवं-'अणेगखम्भसयसण्णिविट्ठाओ अब्भुग्गयसुकयवइरवेइआतोरणवररइअसालभंजिआसुसिलिट्ठविसिट्ठसंठिअपसत्थवेरुलिअविमलखंभाओ णाणामणिकणगरयणखचिअउज्ज-81 लबहसमसुविभत्तभूमिभागाओ ईहामिगउसभतुरगणरमगरविहगवालगकिंनररुरुसरभचमरकुञ्जरवणलयपउमलयभत्ति-8 |चित्ताओ खंभुग्गयवइरवेइआपरिगयाभिरामाओ विजाहरजमलजुअलजंतजुत्ताओविव अच्चीसहस्समालणीआओ | रूवगसहस्सकलिआओ भिसमाणीओ भिब्भिसमाणीओ चक्खुल्लोअणलेसाओ सुहफासाओ सस्सिरीअरूवाओ कंचणम-18| ॥३२२॥ ॥णिरयणधूभिआगाओ गाणाविहपंचवण्णघंटापडागपरिमंडिअअग्गसिहराओ धवलाओ मरीइकवयविणिम्मुअंतीओ XII ~299
SR No.035024
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 24 Jambudwippragyapti Mool evam Vrutti Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages426
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_jambudwipapragnapti
File Size104 MB
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