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________________ आगम (१८) “जम्बूद्वीप-प्रज्ञप्ति" - उपांगसूत्र-७ (मूलं+वृत्ति:) वक्षस्कार [४], ----------------------- ------- मूलं [८६-८७] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[१८]उपांगसूत्र-[७] "जम्बूद्वीपप्रज्ञप्ति" मूलं एवं शांतिचन्द्र विहिता वृत्ति: III वक्षस्कारे द्वीपक्षा प्रत सूत्रांक [८६-८७] श्रीजम्बून्तिचन्द्रीया वृतिः ॥३१॥ ccecene गन्धमादनिःमू.८६ IS उत्तरकुरवः म.८७ दीप अनुक्रम गंधमायणे पक्वारपव्यए २१, गो०! गंधमायणस्स णं वक्खारपब्वयस्स गंधे से जहा णामए कोहपुडाण वा जाब पीसिजमाणाण वा उकिरिजमाणाण वा विकिरिजमाणाण वा परिभुजमाणाण वा जाव ओराला मणुण्णा जाव गंधा अमिणिरसवन्ति, भवे एआरुवे!, णो इणडे समझे, गंधमायणस्स णं इत्तो पतराए चेव जाव गंधे पण्णते, से एएणद्वेणं गोअमा! एवं वुशद गंधमायणे वक्खारपबए २, गंधमायणे अ इत्य देवे महितीए परिवसइ, अदुत्तरं च णं सासए णामधिजे इति । (सूत्र ८६) कहि णं भन्ते ! महाविदेहे चासे उत्तरकुरा णामं कुरा पं०, गो० 1 मंदरस्स पव्वयस्स उत्तरेणं गीलवन्तरस वासहरपव्वयस्स दक्खिणेणं गन्धमायणस्स वक्खारपण्वयस्स पुरत्थिमेणं मालबन्तस्स बक्खारपब्वयस्स पञ्चत्थिमेणं एत्थ णं उत्तरकुरा णामं कुरा पणत्ता पाईणपडीणायया उदीणदाहिणविच्छिण्णा अद्धचंदसंठाणसंठिा इक्कारस जोअणसहस्साई अट्ठ व बायाले जोअणसए दोण्णि अ एगूणबीसइभाए जोअणस्स विक्खम्मेणंति, तीसे जीवा उत्तरेणं पाईणपडीणायया दुहा वक्खारपव्वयं पुढा, जहा-पुरथिमिल्लाए कोडीए पुरस्थिमिहं बक्सारपञ्चयं पुट्ठा एवं पञ्चस्थिमिलाए जाव पचत्थिमिलं वक्खारपव्वयं पुट्ठा, तेवणं जोभणसहस्साई आयामेणन्ति, तीसे णं घणु दाहिणेणं सहि जोअणसहस्साई चत्तारि अ अद्वारसे जोअणसए दुवालस य एगूणवीसइभाए जोअणस्स परिक्सेवेणं, उत्तरकुराए णं भन्ते ! कुराए केरिसए आयारभावपडोआरे पण्णत्ते !, गोयमा! बहुसमरमणिले भूमिभागे पण्णत्ते, एवं पुष्ववणिमा जव सुसममुसमावत्तम्बया सच्चेव णेअब्वा जाव पजमगंधा १ मिअगंधा २ अममा ३ सहा ४ तेतली ५ सणिचारी ६ (सूत्र ८७) [१४१ | ॥३१३॥ -१४२] ~281
SR No.035024
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 24 Jambudwippragyapti Mool evam Vrutti Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages426
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_jambudwipapragnapti
File Size104 MB
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