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________________ आगम (१५) “प्रज्ञापना” – उपांगसूत्र-४ (मूलं+वृत्ति:) पदं [३६], -------------- उद्देशक: [-]------------- दारं [-], -------------- मूलं [३३५] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[१५]उपांगसूत्र-[४] "प्रज्ञापना" मूलं एवं मलयगिरि-प्रणीता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [३३५] 980899 दीप न वुवति, एत्थवि चउवीसं चउथीसा दंडगा भाणियहा । तेयगसमु० जहा मारणंतियस०, णवरं जस्सास्थि, एवं एतेवि चउबीसं चउबीसा दंडगा भाणितवा। एगमेगस्स णं भंते ! नेरइयस्स नेरइयत्ते केवइया आहारसमुग्धाया अतीता, गो! गस्थि, केवइया पु०१, गो०! णत्थि, एवं जाव वेमाणिय त्ते, नवरं मणूसत्ते अतीता कस्सइ अस्थि कस्सइ नत्थि, जस्सत्थि जह० एको वा दो वा उ० तिनि, केवइया पु०१, गो! कस्सति अस्थि क. नथि, जस्सस्थि जह एको वा दो वा तिण्णि वा उ० चत्तारि, एवं सबजीवाणं मणुस्साणं भाणिय, मासस्स मणूसत्ते अतीता कस्सति अस्थि कस्सति नस्थि, जस्सत्थि जहएको वा दो वा तिणि वा उ०चत्तारि, एवं पुरेक्खडावि, एवमेते चउवीस चउवीसा दंडगा जाव वेमाणियचे । एगमेगस्सणं भंते ! नेरइयस्स नेरइयचे के. केवलिसमुग्याया अतीता १, गो! पत्थि, केवइया पुरेक्खडा, गो.! नत्थि, एवं जाव वेमाणियते, णवरं भगृसत्ते अतीता नत्थि, पुरेक्खडा क० अस्थि क. नथि, जस्सत्थि इको, मासस्स मणूसचे अतीवा कस्स ति अस्थि क० नस्थि, जस्सस्थि एको, एवं पुरेक्खडावि, एवमेते चउबीसं चउबीसा दंडगा (मूत्र ३३५) 'मारणंतिए'त्ति मारणान्तिकसमुद्घातः पुरस्कृतचिन्तायां खस्थाने परस्थाने वा एकोत्तरिकया नेतव्यो यावद्वैमानिकस्म वैमानिकत्वे-वैमानिकत्वविषयं सूत्र, तचैवम्-एगमेगस्स भंते ! नेरइयस्स नेरयत्ते केवइया मारगंतियसमुग्पाया अतीता, गोयमा ! अणंता, केवइया पुरेक्खडा ?, गोयमा ! कस्सइ अस्थि कस्सइ नत्वि, सारिeseseesesesese अनुक्रम [६०५] REaratunmhaninaina AJulturary.com ~252~
SR No.035020
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 20 Pragyapana Mool evam Vrutti Part 3
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages336
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_pragyapana
File Size71 MB
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