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________________ आगम (१५) “प्रज्ञापना” – उपांगसूत्र-४ (मूलं+वृत्ति:) पदं [३०], -------------- उद्देशक: [], ------------- दारं [-], -------------- मूलं [३१४] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[१५]उपांगसूत्र-[४] "प्रज्ञापना" मूलं एवं मलयगिरि-प्रणीता वृत्ति: प्रज्ञापनाया मलयवृत्ती. See प्रत सूत्रांक [३१४] ॥५३॥ दीप अनुक्रम [५७४] जाणति तं समयं पासइ ज समय पासह तं समय जाणइ १, गो० नो तिणढे समढे, से केणद्वेण मते! एवं खुधति केवली 8३०पश्यण इमं रयणप्प पुढवि आगारेहिं जं समयं जाणति नो तं समयं पासति जं समय पानो तं समयं जा०, गो! त्तापदं सागारे से गाणे मवति अणागारे से दंसणे भवति, से तेण?णं जाव गो त समयं जाणाति एवं जाव अहे सचमी एवं आकारासोहम्मकप्पं जाव अचुर्य, गेविजगविमाणा अणुत्तरविमाणा, ईसीपम्भारं पुढवीं, परमाणु पोग्गलं दुपदेसियं खंधं जाच [दिज्ञानदअणंतपदेसियं खंध, केवली णं भंते । इमं रयणप्पमं पुढवि अणागारेहिं अहेतुहि अणुवमाहिं अदितेहिं अवण्णेहिं असं- र्शनपृथठाणेहिं अपमाणेहिं अपडोयारेहिं पासति न जाणति , हता! गो! केवली णं इमं रयणप्पमं पुढवि अणागारेहि जाव क्त्वं सू. पासति न जाणति, से केणडेणं भंते ! एवं बु. केवली इमं रयणप्यमं पुढवि अणागारेहिं जाव पासति ण जाणति, गो! अणागारे से दंसणे भवति सागारे से नाणे भवति, से ते गो०!. एवं बुच्चइ-केवली णं इमं रयणप्पमं पुढवि अणागारेहिं जाव पासति ण जाणति, एवं जाव ईसिप्पभारं पुढवि परमाणु पोग्गलं अणंतपदेसियं खंधं पासति न जाणति ।। (सूत्र ३१४) पासपायापर्य समतं ॥३०॥ 'केवली णं भंते " इत्यादि, केवलं ज्ञानं दर्शनं चास्यास्तीति केवली णमिति वाक्यालङ्कतौ भदन्त -परमका ॥५३॥ ल्याणयोगिन् ! 'इमा' प्रत्यक्षत उपलभ्यमानां रत्नप्रभाभिषां पृथिवीं 'आगारोहिति आकारभेदा यथा इयं रसप्रभा-IN पृथिवी त्रिकाण्डा खरकाण्डपङ्ककाण्डअप्काण्डभेदात्, खरकाण्डमपि षोडशभेदं, तद्यथा-प्रथम योजनसहस्रमानं ~169~
SR No.035020
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 20 Pragyapana Mool evam Vrutti Part 3
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages336
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_pragyapana
File Size71 MB
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