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________________ आगम [भाग-१८] “प्रज्ञापना” – उपांगसूत्र-४ (मूलं+वृत्ति:) पदं [१], ------------ उद्देशक: [-], ---------- दारं [-], ----------- मूलं [...३७] + गाथा:(१०८-१२८) पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र-[१५]उपांगसूत्र-[४] "प्रज्ञापना" मूलं एवं मलयगिरि-प्रणीता वृत्ति: प्रत सत्राका प्रज्ञापनायाः मलयवृत्ती प्रज्ञापनापदे मनुष्यप्रज्ञा. [३७]] BCCOR गाथा: सहसंमुइया आसवसंवरे य रोएइ उ निसग्गो ॥११६।। जो जिणदिवे भावे चउबिहे सद्दहाइ सयमेव । एमेव नन्नहतिय निसग्गरुइत्ति नायबो ॥११७। एए चेव उ भावे उवदिहे जो परेण सद्दहह । छउमत्येण जिणेण व उपएसरुइति नायबो॥ ॥११८।। जो हेउमयाणतो आणाए रोयए पवयणं तु । एमेव नन्नहत्ति य एसो आणाई नाम ॥११९।। जो सुत्तमहिअन्तो सुएण ओगाहई उ सम्मत्तं । अंगेण वाहिरेण व सो सुत्तरुइत्ति गायत्रो॥१२०॥ एगपएणेगाई पदाई जो पसरई उ सम्म । उदएच तिल्लविंदू सो बीयरुइति नायबो ॥१२१॥ सो होइ अभिगमरुई सुयनाणं जस्स अत्यओ दिई । इकारस अंगाई पइनगा दिहिवाओ य ॥१२२।। दवाण सबभावा सबपमाणेहिं जस्स उवलद्धा । सबाहिं नयविहीहिं वित्थाररुइति नायबो ॥१२३शादसणनाणचरिते तवविणए सबसमिगतीस । जो किरियाभावरुई सो खलु किरियारुई नाम ।।१२।।। अणभिगहियकुदिही संखेवरुदति होइ नायचो । अविसारओ पवयणे अणभिग्गहिओ य सेसेसु॥१२५।जो अस्थिकायधम्म सुयधम्म खलु चरिचधम्मं च । सद्दहइ जिणाभिहियं सो धम्मरुइति नायवो ॥१२६॥ परमत्वसंथवो वा सुदिपरमत्थसेवणा बावि । बावनकुदंसणवजणा य सम्मत्तसद्दहणा ॥ १२७॥ निस्संकिय निकंखिय निवितिगिच्छा अमूढदिही य । उवव्हथिरीकरणे वच्छल्लपभावणे अट्ट ॥१२८॥ से सरागर्दसणारिया। से किं तं वीयरायदंसणा [य] रिया ?, वीयरायदसणा [य] रिया दुविहा प०, तं०-उवसंतकसायवीयरायदसणा [यरिया य खीणकसायवीयरायदसणा [य] रिया य । से किं तं उपसंतकसायवीयरायदसणा [य] रिया ?, उपसंतकसायवीयरायदंसणा [य] रिया दुविहा प०, तं०-पढमसमयउवसंतकसायवीयरायदसणा [य] रियाय अपढमसमयउवसंतकसायवीयरायदसणा [य] रिया य, अहवा चरिमसमयउवसंतकसायवी दीप अनुक्रम [१६६-१९०]] 992e ॥५६॥ ~124
SR No.035018
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 18 Pragyapana Mool evam Vrutti Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages426
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_pragyapana
File Size93 MB
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