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________________ आगम (०५) [भाग-११]"भगवती"-अंगसूत्र-५ (मूलं+वृत्ति:) शतक [२४], वर्ग [-], अंतर्-शतक [-], उद्देशक [१२], मूलं [७०२] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र- [०५], अंगसूत्र- [०५] "भगवती मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [७०२] दीप अनुक्रम [८४७] व्याख्या- सस्था अणुबंधो जहा ठिती संवेहो तहेव आदिल्लेसु दोसु गमएसु तइयगमए भवादेसो तहेव अट्ठ भवग्ग-४२४ शतके प्रज्ञप्तिःहणाई कालादेसेणं जहन्नेणं बावीसं वाससहस्साई अंतोमुत्तमम्भहियाई उकोसेणं अट्ठासीति वाससह-उद्देशः१२ अभयदेवी-स्साई चउहिं अंतोमुहुत्तेहिं अन्भहियाई ६, सो चेव अप्पणा उकोसकालद्वितीओ जाओ एयस्सवि ओहि- द्वीन्द्रिया यगमगसरिसा तिन्नि गमगा भाणियबा नवरं तिसुधि गमएसु ठिती जहन्नेणं वारस संबच्छराई उकोसेणवि. दिभ्यः पृ. || चारस संवच्छराई, एवं अणुबंधोवि, भवादे जह. दो भवग्गहणाई उकोसेणं अह भवग्गहणाई, कालादे व्युत्पादः ॥८२७॥ सू७०२ द उवजुजिऊण भाणिय जाव णधमे गमए जहन्नेणं बावीसं वाससहस्साई बारसहि संवच्छरेहिं अम्भहि || उक्कोसे० अट्ठासीती वाससहस्साई अडयालीसाए संबच्छरेहिं अभहियाई एवतियं ९॥ जइ तेइंदिरहितो उववजह एवं चेच नव गमगा भाणियचा नवरं आदिल्लेसु तिसुवि गमएम सरीरोगाहणा जहन्नेणं अंगुलस्स | असंखेजहभागं उक्कोसेणं तिन्नि गाउपाई तिन्नि इंदियाई ठिती जहनेणं अंतोमुहत्तं उकोसेणं एगूणपन्नं राई-12 M|| दियाई, तइयगमए कालादेसेणं जहनेणं बाबीसं वाससहस्साई अंतोमुत्तमभहियाई उक्कोसेर्ण अट्ठासीति वाससहस्साई उन्नउई राईदियसयमन्भहियाई एवतियं०, मज्झिमा तिन्नि गमगा तहेव पच्छिमावि तिन्नि || |गमगा तहेव नवरं ठिती जहनेणं एकूणपन्न राइंदियाई उक्कोसेणवि एगणपतं राइंदियाई संवेहो उबर्जुजि-||8| ऊण भाणियपो ९॥ जइ चउरिदिएहिंतो उववजह एवं चेव चारिदियाणवि नव गमगा भाणियदा नवरं ॥२७॥ एतेसु चेव ठाणेसु नाणत्ता भाणियबा सरीरोगाहणा जहन्नेणं अंगुलस्स असंखेजहभागं उक्कोसे० चत्तारि CASSROCRACHCCCCC ~70
SR No.035011
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 11 Bhagavati Mool evam Vrutti Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages384
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size83 MB
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