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________________ आगम (०५) [भाग-११]"भगवती"-अंगसूत्र-५ (मूलं+वृत्ति:) शतक [२५], वर्ग [-], अंतर्-शतक [-], उद्देशक [७], मूलं [७८९-७९२] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र- [०५], अंगसूत्र- [०५] "भगवती मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचिता वृत्ति: क क प्रत सूत्रांक [७८९-७९२] टीप %45-4600-56455-25645-46-2 || सहाणे नो हीणे तुल्ले नो अम्भहिए। एएसि णं भंते ! सामाइयछेदोवट्ठावणियपरिहारविसुद्धिपसुहमसंपराय अहक्खापसंजयाणं जहन्नकोसगाणं चरितपजवाणं कयरे २ जाव विसेसाहिया वा?, गोयमा! सामाइय| संजयस्स छेओबट्ठावणियसंजयस्स य एएसिणं जहन्नगा चरित्तपजवा दोण्हवि तुला सवत्थोवा परिहारविसुद्धि-100 यसंजयस्स जहन्नगा चरित्तपजवा अणंतगुणा तस्स चेव उकोसगाचरित्तपजवा अणंतगुणा सामाइयसंजयस्स छेओवट्ठावणियसंजयस्स य एएसिणं उकोसगा चरित्तपजवा दोण्हवि तुल्ला अनंतगुणा सुहमसंपरायसंजयस्स जहन्नगा चरित्तपज्जवा अणंतगुणा तस्स चेव उक्कोसगा चरित्तपजवा अणंतगुणा अहक्खायसंजयस्स अजहन्नमणुक्कोसगा चरित्तपज्जवा अर्णतगुणा १५॥ सामाइयसंजए णं भंते! किं सजोगी होज्जा अजोगी होजा?, गोयमा ! सजोगी जहा पुलाए एवं जाच सुहुमसंपरायसंजए अहक्खाए जहा सिणाए १६॥सामाइपसंजए णं भंते ! किं सागारोवउत्ते होजा अणागारोवउ०१, गोयमा! सागारोवउत्ते जहा पुलाए एवं जाव अहक्खाए, | नवरं सुहमसंपराए सागारोवउत्ते होजा नो अणागारोवउत्से होजा १७ ॥ सामाइयसंजए णं भंते ! किं सकसायी होजा अकसायी होजा?, गोयमा! सकसायी होज्जा नो अकसायी होजा, जहा कसायकुसीले, एवं छेदोवट्ठायणिएवि, परिहारविसुद्धिए जहा पुलाए, मुहुमसंपरागसंजए पुच्छा, गोयमा ! सकसायी होजा नो अकसायी होजा, जइ सकसायी होजा से णं भंते ! कतिसु कसायेसु होला ?, गोयमा! एगमि संजलणलोभे होजा, अहक्खायसंजए जहा नियंठे १८॥ सामाइयसंजए णं भंते ! किंसलेस्से होज्जा अलेस्से होजा? - ब- अनुक्रम [९४४-९४८..] . SAREastatinintennational | संयत, तस्य स्वरुपम, सामायिकसंयत आदि पञ्च-भेदा:, संयतस्य विविध-वक्तव्यता ~241
SR No.035011
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 11 Bhagavati Mool evam Vrutti Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages384
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size83 MB
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