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________________ आगम (०५) [भाग-११]"भगवती"-अंगसूत्र-५ (मूलं+वृत्ति:) शतक [२५], वर्ग [-], अंतर्-शतक [-1, उद्देशक [६], मूलं [७६५-७६८] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र- [०५], अंगसूत्र- [०५] "भगवती मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [७६५-७६८] २५ शतके उद्देशः ६ पुलाकादेः पर्यवयोगकषायाःसू ७६५-७६७ व्याख्या सहाणसन्निगासेणं पुच्छा, गोयमा! णो हीणे तुल्ले णो अम्भहिए ॥ एएसिणं भंते ! पुलागवकुसपडिसेवणा- प्रज्ञप्तिः कुसीलकसायकुसीलनियंठसिणायाणं जहन्नुकोसगाणं धरित्तपत्रवाणं कयरे १ जाब विसेसाहिया था, गोयमा ! पुलागस्स कसायकुसीलस्स य एएसि णं जहन्नगा चरित्तपज्जया दोण्हषि तुल्ला सवत्थोषा, पुलागल्स | या वृत्तिः२ उक्कोसगा चरित्तपज्जचा अनंतगुणा, बउसस्स पडिसेवणाकुसीलस्स य एएसिणं जहन्नगा चरित्सवजया ॥८९९॥ दोण्हवि तुल्ला अर्णतगुणा, बउसस्स उफोसगा चरित्तपञ्जचा अर्णतगुणा, पडिसेवणाकुसीलस्स कोसगा| चरितपचवा अणंतगुणा, कसायकुसीलस्स उन्कोसगा चरित्तपनवा अणंतगुणा, णियंठस्स सिणायस्स य एतेसि णं अजहन्नमणुकोसगा चरित्तपजवा दोण्हवि तुल्ला अणंतगुणा १५॥(सूत्रं ७६५) पुलाए गंभंते! |किं सयोगी होना अजोगी या होला ?, गोयमा सयोगी होजा नो अयोगी होजा, जइ सयोगी होजा किं मणजोगी होजा वहजोगी होजा काययोगी होला?, गोयमा! मणजोगी वा होना वयजोगी चा होजा कायजोगी वा होजा, एवं जाब नियंठे। सिणाए णं पुच्छा, गोपमा! सयोगी वा होजा अयोगी वा होजा, जइ सयोगी होजा किं मणजोगी होजा सेसं जहा पुलागस्स १६॥ (सूत्रं ७६६) पुलाए णं मंते । किं ६ सागारोवपत्ते होजा अणागारोवउसे होजा?,गोयमा! सागारोषउत्ते वा होजा अणागारोवउसे वा होजा एवं I#जाच सिणाए १७॥ (सूत्रं ७६७) पुलाए णं भंते। सकसाथी होजा अकसायी होजा, गोयमा ! सकासाची | होजा णो अफसायी होजा, जह सकसाई से णे भंते ! कतिसु कसाएमु होजा, गोयमा बसु दीप अनुक्रम [९१५-९१८] ॥८९९॥ SAREastatinintennational | निर्ग्रन्थः, तस्य स्वरुपम, भेदा: इत्यादि विविध-विषय-वक्तव्यता ~2144
SR No.035011
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 11 Bhagavati Mool evam Vrutti Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages384
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size83 MB
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