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________________ आगम (०५) प्रत सूत्रांक [७२६] दीप अनुक्रम [८७२] [भाग-११]“भगवती”– अंगसूत्र -५ (मूलं + वृत्ति:) शतक [२५], वर्ग [-], अंतर् शतक [-] उद्देशक [३], मूलं [ ७२६] पूज्य आगमोद्धारकश्री संशोधितः मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित.. आगमसूत्र - [०५] अंगसूत्र- [ ०५] "भगवती" मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचिता वृत्तिः व्याख्याप्रज्ञप्तिः अभयदेवीया वृत्तिः २ ॥८६०॥ से जहनेणं बत्तीसपएसिए बत्तीसपएसोगाढे ५०, उक्कोसेणं अनंतपएसिए असंखेजपएसोगादे || तंसे णं भंते! संठाणे कतिपदेसिए कतिपदेसोगाढे प० १, गोषमा ! तंसे णं संठाणे दुविहे पं० तं० घणतंसे प पपरतंसे य, तत्थ णं जे से पपरतंसे से दुविहे पं० तं०-ओयपएसिए य जुम्मपएसिए य, तत्थ णं जे से ओयपएसिए से जह० तिपएसिए तिपएसोगाढे ५० उकोसेणं अनंतपएसिए असंखेजपरसोगाढे, तत्थ णं जे से जुम्मपएसिए से जहनेणं छप्पएसिए छप्पएसोगाडे ५० उकोसेणं अनंतपएसिए असंखेज्जपएसोगा प०, तत्थ णं जे से घणतंसे से दुविहे प०, तं०-ओपएसिए जुम्मपएसिए य, तत्थ णं जे से ओपए सिए से जहनेणं पणतीसपएसिए पणतीसपएसोगाढे उक्कोसेणं अनंतपएसिए तं चैव तत्थ णं जे से जुम्मपएसिए से जलेणं ४ चप्पएसिए चउप्पएसोगाढे १० उक्को० अनंतपएसिए तं चैव ॥ चउरंसे णं भंते संठाणे कतिपदेसिए ? पुच्छा, गोयमा ! चउरंसे ठाणे दुबिहे प० भेदो जहेब बट्टस्स जाव तत्थ णं जे से ओपएसिए से जहनेणं नवपएसिए नवपएसो गाढे प०, उक्कोसेणं अनंतपएसिए असंखेचप एसोगाढे ५०, तत्थ णं जे से जुम्मपदेसिए से जहनेणं चउपएसिए चउपरसोगाढे प० उक्कोसेणं अनंतपएसिए तं चैव तत्थ णं जे से घणचउरंसे से दुविहे प०, तंजा-ओपपएसिए जुम्भपएसिए, तत्थ णं जे से ओपपरसिए से जहनेणं सत्तावीसइपए| सिए सत्तावीसतिपए सोगाढे उक्को० अणतपएसिए तहेब तत्थ जे से जुम्मपएसिए से जहनेणं अट्ठपएसिए अपएसोगाडे प० उक्को० अनंतपएसिए तहेब || आयए णं भंते ! संठाणे कतिपदेसिए कतिपए सोगाढे प० १ Eucation International For Penal Use Only ~ 136~ २५ शतके उद्देशः ३ वृत्तादीनां प्रदेशावगा ही सू. ७२६ १८६०॥
SR No.035011
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 11 Bhagavati Mool evam Vrutti Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages384
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size83 MB
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