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________________ आगम (०५) [भाग-११]"भगवती"-अंगसूत्र-५ (मूलं+वृत्ति:) शतक [२४], वर्ग [-], अंतर्-शतक [-], उद्देशक [२४], मूलं [७१५] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित..आगमसूत्र- [०५], अंगसूत्र- [०५] "भगवती मूलं एवं अभयदेवसूरि-रचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक [७१५] जहा जोहसिएम ज्ववजमाणस्स नवरं सम्मदिट्ठीवि मिच्छादि० णो सम्मामिच्छाविट्ठी णाणीवि अन्नाणीवि टू दोणाणा दो अन्नाणा नियम ठिती जह० दो पलिओवमाई उक्कोसेणं छप्पलिओवमाई एवतियं १, सो घेव जहन्नकालाडितिएम उववन्नो एस चेव वत्तबया नवरं कालादेसेणं जहन्नेणं दो पलिओवमा उक्कोसेणं चत्तारि पलिओवमाई एवतियं २, सो चेव उक्कोसकालहितिएसु उववन्नो जहन्नेणं तिपलिओवम उकोसेणवि तिपलिओचम एस व वत्तवया नवरं ठिती जहन्नेणं तिन्नि पलिओचमाई उक्कोसेणवि तिन्नि पलिओवमाई सेस तहेव कालादे० जह० छप्पलिओवमाई उक्कोसेणवि छप्पलिओवमाइंति एचतियं ३, सो चेव अप्पणा जहन्न कालद्वितिओ जाओ जह० पलिओवमद्वितिएसु उकोसे० पलिओवमद्वितिएम एस चेव वत्तवया नवरं ओगादहणा जह० धणुहपुहुत्तं उकोसेणं दो गाउयाई, ठिती जहन्नेणं पलिओवम उफोसेणवि पलिओवर्म सेसं तहेव, है कालादे०जह दो पलिओचमाई उफोसेणंपि दो पलिओवमाई एवतियं ६, सो चेव अप्पणा उक्कोसकालट्ठि-12 तीओ जाओ आदिल्लगमगसरिसा तिन्नि गमगा या नवरं ठिर्ति कालादेसं च जाणेजा ९॥ जइ संखे जवासाउयसन्निपंचिंदिय संखेजवासाउयस्स जहेव असुरकुमारेसु उववजमाणस्स तहेव नववि गमा, नवरं है ठिति संवेहं च जाणे, जाहे य अप्पणा जहन्नकालाहितिओ भवति ताहे तिमुवि गमएसु सम्मदिट्ठीवि मिच्छादि० णो सम्मामिच्छादिही दो नाणा दो अन्नाणा नियम सेसं तं चेव ॥ जद मणुस्सहिंतो उववजंति | भेदो जहेव जोतिसिएसु उवबजमाणस्स जाव असंखेज्जवासाउयसन्निमणुस्से णं भंते !जे भविए सोहम्मे कप्पे दीप अनुक्रम [८६०] ~113
SR No.035011
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 11 Bhagavati Mool evam Vrutti Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages384
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size83 MB
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