SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 106
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ९७ सावाडे रे सांमल पास सोहामणा विव पांचसे रे पासे श्राजिनवर तणा ॥१॥ जिनवर तणा ते बिंब जाणुं । उपर सत्तावन ए। त्रेवीसमो जिनराज वंदं । मोहिओ मुज मन्न रे। सातमो जिन प्रासाद बीजे । वंदीए ऊलट धरी । चालीस उपरे सात अधिकी सोहे तिहां प्रतिमा भली ॥२॥ सोलसमो रे शांतिजिनेसर जगजयो, भसातवाडे देखी मुझ मन सुख थयो। पांसठ जिन रे तिम वली कलिकुंड पासजी, जीराउल रे पूरे वंडित आसजी। आस पुरे गौतम स्वामी, लब्धिनो भंडार ए सगरकुइ पांत्रीस जिनवर, पार्श्वनाथ जुहारए । हबदपुरमां थूभ वर्दू जास महिमा अतिघणो, एकमना जे सेव सारे पूरे मनोरथ तेह तणो ॥३॥ वलियारवाडे रे, प्रतिमा सोहे सात रे । मूलनायक रे, शांतिजिणंद विख्यात रे। जोगीवाडे रे, जागतो जिन वेवीसमो। अठावन रे, प्रतिमासु भविअण नमो ॥४॥ नमो ऋषभ जिणंद बिजे, देहरे अति सुंदरु । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034999
Book TitlePatan Chaitya Paripati
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKalyanvijay
PublisherHansvijayji Jain Free Library
Publication Year1926
Total Pages134
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy